पूर्णिया शहर में पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन पर ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया। इस धार्मिक आयोजन में लाखों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। जुलूस से पहले, जिले भर से आए मुस्लिम समुदाय के सदस्य ऐतिहासिक रंगभूमि मैदान में जुटे। यहां से जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकला। रंगभूमि मैदान से शुरू हुआ यह विशाल जुलूस शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होकर गुजरा। इस दरमियान रंगभूमि मैदान से निकलकर, गिरजा चौक, जेल चौक, आरएन शाह चौक, भट्टा बाजार, रजनी चौक, खजांची, लाइन बाजार चौक, पंचमुखी मंदिर सरीखे मुख्य मार्ग से होते हुए फिर रंगभूमि मैदान जाकर पहुंचा। रंगभूमि मैदान पहुंच कर ये जुलूस विशाल सभा के तब्दील हुआ। जहां उलेमाओं ने पैगम्बर हजरत मुहम्मद की पैदाइश के मौके पर देश में अमन-शांति की दुआ मांगी।
इस्लामिक झंडे के बीच लहराता दिखा तिरंगा जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के हाथों में इस्लामी परचम और शांति के संदेश देती तख्तियां थीं। रास्ते भर पैगंबर हजरत मोहम्मद की शान में तकबीर के नारे गूंजते रहे। इन सब के बीच भारत का तिरंगा भी शान से लहराता रहा।
शीरतुन नबी कमेटी के मौलाना कुतुबुद्दीन ने जुलूस के उद्देश्य और महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि 12 रबी-उल-अव्वल के मुकद्दस मौके पर निकला यह जुलूस-ए-मोहम्मदी समाज में अमन, शांति, भाईचारगी और आपसी मोहब्बत का पैगाम देता है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद में पूरे पूर्णिया जिले से लाखों लोग एकजुट हुए हैं ताकि इंसानियत और भलाई की उनकी तालीमात को आम किया जा सके।
रंगभूमि मैदान में विशाल जलसा
पूरे शहर का भ्रमण करने के बाद जुलूस पुनः रंगभूमि मैदान पहुंचा, जहां यह एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। मंच से देश के प्रमुख उलेमाओं और विद्वानों ने तकरीर की। वक्ताओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद के बताए रास्ते नेकी, इंसाफ, गरीबों की मदद और आपसी सौहार्द पर चलने की अपील की। मुल्क की तरक्की, हिफाजत और अमन-चैन के लिए सामूहिक दुआ मांगी गई। प्रशासन की चौकसी रही जुलूस के दौरान पूर्णिया प्रशासनिक महकमा भी साथ साथ दिखा। भारी संख्या में पुलिस बल जगह जगह तैनात रहा। जुलूस के साथ साथ पुलिस के अधिकारी भी चलते नज़र आए। आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं जुलूस में शामिल रहे ।
जुलूस में शामिल लोगों के लिए सेवा भाव से शरबत, पानी, नींबू पानी जैसी सुविधाओं के साथ पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी की ओर से स्टॉल लगाए। लाइन बाजार चौक से गुज़रते वक्त जुलूस में शामिल लोगों को खुद से महापौर पति जितेंद्र यादव शरबत और पानी बांटते नजर आए।
ईद मीलादुन्नबी का ऐतिहासिक महत्व
पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने 12 रबी-उल-अव्वल को सन् 571 ईस्वी में मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उन्हें पूरे संसार के लिए रहमत (दया और करुणा का स्रोत) माना गया है। उन्होंने समाज से भेदभाव, ऊंच-नीच और बुराइयों को खत्म कर सत्य, शांति, सहिष्णुता और महिला अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। ईद मीलादुन्नबी का दिन उनके जीवन, त्याग और मानवतावादी आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का पर्व है। पूर्णिया शहर में पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन पर ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाला गया। इस धार्मिक आयोजन में लाखों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। जुलूस से पहले, जिले भर से आए मुस्लिम समुदाय के सदस्य ऐतिहासिक रंगभूमि मैदान में जुटे। यहां से जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकला। रंगभूमि मैदान से शुरू हुआ यह विशाल जुलूस शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होकर गुजरा। इस दरमियान रंगभूमि मैदान से निकलकर, गिरजा चौक, जेल चौक, आरएन शाह चौक, भट्टा बाजार, रजनी चौक, खजांची, लाइन बाजार चौक, पंचमुखी मंदिर सरीखे मुख्य मार्ग से होते हुए फिर रंगभूमि मैदान जाकर पहुंचा। रंगभूमि मैदान पहुंच कर ये जुलूस विशाल सभा के तब्दील हुआ। जहां उलेमाओं ने पैगम्बर हजरत मुहम्मद की पैदाइश के मौके पर देश में अमन-शांति की दुआ मांगी।
इस्लामिक झंडे के बीच लहराता दिखा तिरंगा जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के हाथों में इस्लामी परचम और शांति के संदेश देती तख्तियां थीं। रास्ते भर पैगंबर हजरत मोहम्मद की शान में तकबीर के नारे गूंजते रहे। इन सब के बीच भारत का तिरंगा भी शान से लहराता रहा।
शीरतुन नबी कमेटी के मौलाना कुतुबुद्दीन ने जुलूस के उद्देश्य और महत्व के बारे में बात करते हुए कहा कि 12 रबी-उल-अव्वल के मुकद्दस मौके पर निकला यह जुलूस-ए-मोहम्मदी समाज में अमन, शांति, भाईचारगी और आपसी मोहब्बत का पैगाम देता है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की याद में पूरे पूर्णिया जिले से लाखों लोग एकजुट हुए हैं ताकि इंसानियत और भलाई की उनकी तालीमात को आम किया जा सके।
रंगभूमि मैदान में विशाल जलसा
पूरे शहर का भ्रमण करने के बाद जुलूस पुनः रंगभूमि मैदान पहुंचा, जहां यह एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। मंच से देश के प्रमुख उलेमाओं और विद्वानों ने तकरीर की। वक्ताओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद के बताए रास्ते नेकी, इंसाफ, गरीबों की मदद और आपसी सौहार्द पर चलने की अपील की। मुल्क की तरक्की, हिफाजत और अमन-चैन के लिए सामूहिक दुआ मांगी गई। प्रशासन की चौकसी रही जुलूस के दौरान पूर्णिया प्रशासनिक महकमा भी साथ साथ दिखा। भारी संख्या में पुलिस बल जगह जगह तैनात रहा। जुलूस के साथ साथ पुलिस के अधिकारी भी चलते नज़र आए। आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं जुलूस में शामिल रहे ।
जुलूस में शामिल लोगों के लिए सेवा भाव से शरबत, पानी, नींबू पानी जैसी सुविधाओं के साथ पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी की ओर से स्टॉल लगाए। लाइन बाजार चौक से गुज़रते वक्त जुलूस में शामिल लोगों को खुद से महापौर पति जितेंद्र यादव शरबत और पानी बांटते नजर आए।
ईद मीलादुन्नबी का ऐतिहासिक महत्व
पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने 12 रबी-उल-अव्वल को सन् 571 ईस्वी में मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उन्हें पूरे संसार के लिए रहमत (दया और करुणा का स्रोत) माना गया है। उन्होंने समाज से भेदभाव, ऊंच-नीच और बुराइयों को खत्म कर सत्य, शांति, सहिष्णुता और महिला अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। ईद मीलादुन्नबी का दिन उनके जीवन, त्याग और मानवतावादी आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का पर्व है।

