पीलीभीत में बुधवार को ईद मिलादुन्नबी का त्योहार अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। जनपद के पूरनपुर, शेरपुर कलां, बरखेड़ा और बीसलपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की यौम-ए-पैदाइश के उपलक्ष्य में भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस में परचमों और आकर्षक झांकियों को शामिल किया गया था। पूरनपुर में जुलूस मोहल्ला करीमगंज से शुरू होकर स्टेशन रोड और नगरपालिका चौराहा से गुजरा। यह मोहल्ला खानकाह स्थित सावरी आहता पर समाप्त हुआ। जुलूस में बच्चे, युवा और बुजुर्ग ‘सरकार की आमद मरहबा’ के नारे लगाते और नात-ए-पाक पेश करते हुए चल रहे थे। रास्ते में स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर जुलूस का स्वागत किया। जगह-जगह लंगर और तबर्रुक के स्टॉल भी लगाए गए थे। मुस्लिम बस्तियों और घरों को विशेष रूप से सजाया गया था और फातिहाख्वानी का आयोजन किया गया। जुलूस के दौरान उलमा-ए-किराम ने पैगंबर साहब की सीरत (जीवन चरित्र) पर प्रकाश डाला। बरखेड़ा कस्बे में भी बुधवार को ईद मिलादुन्नबी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। जुलूस के दौरान आतिशबाजी और पटाखे चलाए गए। मुस्लिम समुदाय के लोग रबी-उल-अव्वल की 12वीं शरीफ को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाते हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म 571 ईस्वी में मक्का शहर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब था। उनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम अमीना बीबी था। माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने 610 ईस्वी में मक्का की हीरा नामक गुफा में तालीम हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म की पवित्र कुरान की तिलावत की। जिले भर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। जुलूस की निगरानी ड्रोन कैमरों से की गई। पुलिस प्रशासन ने यातायात को सुचारु रखने के लिए पहले से ही रूट डायवर्जन लागू कर दिया था, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

