Bhojshala विवाद: अदालत के आदेश के उल्लंघन का आरोप, हिंदू संगठनों ने किया Dhar बंद

Bhojshala विवाद: अदालत के आदेश के उल्लंघन का आरोप, हिंदू संगठनों ने किया Dhar बंद

मध्यप्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद से संबंधित उच्चतम न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन न करने का प्रशासन पर आरोप लगाते हुए दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से मंगलवार दोपहर तक आहूत बंद का शहर के बाजारों में व्यापक असर दिखाई दिया। बंद के दौरान धार शहर और आसपास के नगरों में दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। बंद के आह्वान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से पूरे जिले में सुरक्षा के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

दोपहर 12 बजे के बाद हिंदू समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग लालबाग क्षेत्र में एकत्र हुए और यहां से प्रदर्शन करते हुए रैली के रूप में सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने जिलाधिकारी के नाम अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय के लिए सर्वे नंबर 596 पर नमाज अदा करने का निर्देश दिया था लेकिन प्रशासन इसका पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने भोजशाला परिसर के निकट सर्वे नंबर 612 को नमाज के लिए चुना है।

जलोदिया ने कहा, ‘‘इससे, भोजशाला मंदिर का रास्ता भी अवरुद्ध होता है। इसके विरोध में धार जिले में सकल हिंदू समाज ने आज (मंगलवार को) बंद का आह्वान किया है।’’
भोज उत्सव समिति के उपाध्यक्ष श्याम मालवा ने कहा कि विवाद खसरा नंबर 596 और 612 के स्थान को लेकर है। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार खसरा नंबर 596 पर नमाज कराई जानी चाहिए, जबकि नमाज खसरा नंबर 612 पर कराई जा रही है, जो भोजशाला से सटा हुआ क्षेत्र है।

मालवा ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर हिंदू समाज में आक्रोश है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि नई व्यवस्था बनाने से पहले हिंदू समाज को विश्वास में नहीं लिया गया। ज्ञापन में कहा गया, “हिंदू समाज उच्चतम न्यायालय के आदेश या किसी वर्ग की आराधना के खिलाफ नहीं है, लेकिन धार में लंबे समय से बनी शांति और सामाजिक सौहार्द कायम रहना चाहिए।”
ज्ञापन के जरिए प्रशासन से मांग की गई कि किसी भी नई व्यवस्था से पहले हिंदू समाज की भावनाओं का ध्यान रखा जाए।

धार जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने बताया कि ज्ञापन में भोजशाला से संबंधित विषय को लिखित रूप में प्रशासन के समक्ष रखा गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित है, इसलिए वैधानिक तथ्यों का परीक्षण करते हुए आवश्यक प्रावधानों के तहत आगे कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जब तक मामला अदालत के विचाराधीन है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है, तब तक सभी पक्षों के लिए कानूनी विकल्प खुले हुए हैं।

मीणा ने बताया कि प्रशासन न्यायालय के आदेशों और कानूनी प्रावधानों के तहत ही आगे कदम उठाएगा। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, जिसके बाद बाजार में धीरे-धीरे दुकानें खुलने लगीं और शहर में जनजीवन सामान्य हो गया। धार बंद के आह्वान को लेकर धार पुलिस पूरी तरह सतर्क रही और सकल हिंदू समाज द्वारा बुलाए गए इस बंद के दौरान शहर में शांति रही।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर पुलिस बल तैनात किया गया था। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मई में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित गया था। इसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष उठाया गया, जहां शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि मुस्लिम समुदाय को विवादित भोजशाला परिसर से सटे दरगाह परिसर में शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए।

न्यायालय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने परिसर के निकट सर्वे नंबर 612 पर नमाज के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कीं और पिछले कुछ सप्ताह से मुस्लिम समुदाय यहां नमाज अदा कर रहा है। ग्यारहवीं शताब्दी के इस स्मारक की धार्मिक प्रकृति को लेकर विवाद उस समय उत्पन्न हुआ था जब मुस्लिम पक्ष ने इसे कमाल मौला मस्जिद बताया, जबकि हिंदू पक्षकारों का कहना था कि यहां परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया। अदालत के फैसले के बाद हर मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करते हैं।

इस दौरान श्रद्धालु सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और हवन कीर्तन भी करते हैं।

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