तुकाराम मुंढे के आदेश पर सीएम फडणवीस की रोक! कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने उठाया खाद्य तेल बैन का मुद्दा

तुकाराम मुंढे के आदेश पर सीएम फडणवीस की रोक! कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने उठाया खाद्य तेल बैन का मुद्दा

Tukaram Mundhe FDA action: महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल (कुकिंग ऑयल) की बिक्री पर लगाई गई पूरी तरह से रोक को लेकर अब सरकार के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे के इस फैसले पर सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई। कुछ मंत्रियों ने इस फैसले को छोटे व्यापारियों के साथ-साथ ग्रामीण और गरीब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुले खाद्य तेल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मिलावट रोकने के लिए लिया गया था फैसला

खाद्य पदार्थों में मिलावट और स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र एफडीए की ओर से राज्यभर में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत खाद्य तेल में मिलावट रोकने और लोगों को गुणवत्तापूर्ण तेल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खुले तेल की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला लिया गया था।

नियमों का उल्लंघन करने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, यदि मिलावटी तेल से मानव स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होता है तो 7 साल तक की जेल का प्रावधान भी किया गया है।

हालांकि, इस फैसले के बाद खाद्य तेल व्यापारियों और छोटे किराना दुकानदारों में नाराजगी देखने को मिली। व्यापारियों का कहना है कि खुले तेल की बिक्री बंद होने से उनका कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे आर्थिक तौर पर कमजोर ग्राहकों का भी नुकसान हुआ है, क्योंकि उन्हें ब्रांडेड पैक्ड खाद्य तेल की तुलना में कम कीमत पर खुला खाद्य तेल मिलता था।

मंत्रिमंडल में मंत्रियों ने उठाया गरीबों का मुद्दा

मंत्रिमंडल की बैठक में सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने खुले तेल की बिक्री पर रोक का मुद्दा उठाया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत कुछ अन्य मंत्रियों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

मंत्रियों ने कहा कि मिलावट के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन खुले तेल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने से छोटे दुकानदारों और गरीब उपभोक्ताओं के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

मंत्रियों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों, झुग्गी बस्तियों और रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों का एक बड़ा वर्ग अपनी जरूरत के हिसाब से 10 से 20 रुपये का तेल खरीदता है। ऐसे लोगों के लिए एक साथ एक लीटर या उससे अधिक तेल खरीदना आर्थिक रूप से मुश्किल होता है।

छोटे पैक हर जगह उपलब्ध नहीं

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि बाजार में बड़ी कंपनियों के 100 या 250 ग्राम वाले सीलबंद तेल के पैकेट हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में खुले तेल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगने से कम आय वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

मंत्रियों ने मांग की कि ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे लोगों को शुद्ध और अच्छी गुणवत्ता वाला तेल भी मिले और पारंपरिक तरीके से तेल बेचने वाले छोटे व्यापारियों का कारोबार भी चलता रहे।

फडणवीस ने दिया SOP बनाने का आदेश

मंत्रियों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अन्न एवं औषधि प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया कि खुले खाद्य तेल की बिक्री पर सरसरी तौर पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय विशेष दिशानिर्देश (SOP) तैयार की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को अच्छी गुणवत्ता और सुरक्षित तेल मिलना जरूरी है। साथ ही पारंपरिक रूप से यह कारोबार करने वाले व्यापारियों और खुले तेल की खरीद करने वाले गरीब ग्राहकों के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। इसलिए तेल की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ऐसा रास्ता निकालने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे छोटे व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित न हो।

मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी

हालांकि मंत्रियों ने IAS तुकाराम मुंढे की अगुवाई में एफडीए की मिलावट विरोधी कार्रवाई का समर्थन किया है। ऐसे में खाद्य तेल में मिलावट के खिलाफ जांच और कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। हालांकि, खुले तेल की बिक्री को लेकर अब नए नियम और दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

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