समस्तीपुर में पेपरलेस रजिस्ट्री, सात दिन में सिर्फ पांच निबंधन:रजिस्ट्रार बोले- सरकार ने अच्छी पहल की है, लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा

समस्तीपुर में पेपरलेस रजिस्ट्री, सात दिन में सिर्फ पांच निबंधन:रजिस्ट्रार बोले- सरकार ने अच्छी पहल की है, लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा

समस्तीपुर में बिहार सरकार की ओर से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर शुरुआती दिनों में लोगों की दिलचस्पी कम दिख रही है। नई व्यवस्था लागू होने के सात दिनों के अंदर महज पांच दस्तावेजों का निबंधन हुआ है। यह आंकड़ा तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब पहले प्रतिदिन 100 से 150 दस्तावेजों का निबंधन होता था। पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय में कामकाज का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। इस नई प्रणाली को लेकर आम लोगों के साथ-साथ दस्तावेज तैयार करने वाले ‘कातिब’ (दस्तावेज लेखक) में भी असमंजस की स्थिति है। बताया जा रहा है कि जिले के सैकड़ों दस्तावेज लेखकों ने फिलहाल अपना काम बंद कर दिया है, जिससे वे खुद को बेरोजगार महसूस कर रहे हैं। उनके सामने नई प्रक्रिया को समझने और उसके अनुरूप काम करने की चुनौती है। ‘सरकार ने अच्छी पहल की है’ रजिस्ट्री कार्यालय के रजिस्ट्रार अमित कुमार ने पेपरलेस व्यवस्था को सरकार की एक अच्छी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि इस नई प्रणाली से रजिस्ट्री कराने वाले उपभोक्ताओं के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। लोगों में जागरूकता की कमी रजिस्ट्रार ने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में रजिस्ट्री की संख्या काफी कम रही। शनिवार को दो रजिस्ट्री हुईं, जबकि सोमवार को तीन रजिस्ट्री कराई गईं। इस तरह, सात दिनों के भीतर कुल पांच रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आई है। नई व्यवस्था की शुरुआत होने के कारण लोगों में फिलहाल जागरूकता की कमी है। रजिस्ट्रार ने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे लोगों को पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी, वैसे-वैसे रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने लोगों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक करने और इसके फायदे समझाने की आवश्यकता पर जोर दिया। ट्रेनिंग देने की मांग इधर, रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज लेखकों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है। लंबे समय से पारंपरिक तरीके से दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में लोगों की मदद करने वाले ‘कातिबों’ के लिए डिजिटल व्यवस्था में खुद को ढालना बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में उनके बीच प्रशिक्षण और नई प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठने लगी है। फिलहाल पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के शुरुआती परिणाम बेहद धीमे नजर आ रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव की शुरुआती स्थिति है और समय के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ने पर रजिस्ट्री की संख्या में भी तेजी आएगी। आने वाले दिनों में नई व्यवस्था किस तरह लोगों के बीच स्वीकार्य होती है, यह देखने वाली बात होगी। समस्तीपुर में बिहार सरकार की ओर से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर शुरुआती दिनों में लोगों की दिलचस्पी कम दिख रही है। नई व्यवस्था लागू होने के सात दिनों के अंदर महज पांच दस्तावेजों का निबंधन हुआ है। यह आंकड़ा तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब पहले प्रतिदिन 100 से 150 दस्तावेजों का निबंधन होता था। पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय में कामकाज का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। इस नई प्रणाली को लेकर आम लोगों के साथ-साथ दस्तावेज तैयार करने वाले ‘कातिब’ (दस्तावेज लेखक) में भी असमंजस की स्थिति है। बताया जा रहा है कि जिले के सैकड़ों दस्तावेज लेखकों ने फिलहाल अपना काम बंद कर दिया है, जिससे वे खुद को बेरोजगार महसूस कर रहे हैं। उनके सामने नई प्रक्रिया को समझने और उसके अनुरूप काम करने की चुनौती है। ‘सरकार ने अच्छी पहल की है’ रजिस्ट्री कार्यालय के रजिस्ट्रार अमित कुमार ने पेपरलेस व्यवस्था को सरकार की एक अच्छी पहल बताया है। उन्होंने कहा कि इस नई प्रणाली से रजिस्ट्री कराने वाले उपभोक्ताओं के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। लोगों में जागरूकता की कमी रजिस्ट्रार ने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में रजिस्ट्री की संख्या काफी कम रही। शनिवार को दो रजिस्ट्री हुईं, जबकि सोमवार को तीन रजिस्ट्री कराई गईं। इस तरह, सात दिनों के भीतर कुल पांच रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आई है। नई व्यवस्था की शुरुआत होने के कारण लोगों में फिलहाल जागरूकता की कमी है। रजिस्ट्रार ने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे लोगों को पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी, वैसे-वैसे रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने लोगों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक करने और इसके फायदे समझाने की आवश्यकता पर जोर दिया। ट्रेनिंग देने की मांग इधर, रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज लेखकों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है। लंबे समय से पारंपरिक तरीके से दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में लोगों की मदद करने वाले ‘कातिबों’ के लिए डिजिटल व्यवस्था में खुद को ढालना बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में उनके बीच प्रशिक्षण और नई प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी उठने लगी है। फिलहाल पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के शुरुआती परिणाम बेहद धीमे नजर आ रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव की शुरुआती स्थिति है और समय के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ने पर रजिस्ट्री की संख्या में भी तेजी आएगी। आने वाले दिनों में नई व्यवस्था किस तरह लोगों के बीच स्वीकार्य होती है, यह देखने वाली बात होगी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *