TCS और Porsche के बीच ₹14,000 करोड़ की Strategic Partnership, ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में आएगा बड़ा बदलाव

TCS और Porsche के बीच ₹14,000 करोड़ की Strategic Partnership, ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में आएगा बड़ा बदलाव

टीसीएस ने जर्मनी की लग्जरी वाहन निर्माता कंपनी पोर्शे की वाहन और औद्योगिक परामर्श इकाई एमएचपी को खरीदने का फैसला किया है। टीसीएस के मुताबिक यह सौदा 320 मिलियन यूरो यानी करीब 3,300 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य पर होगा। समझौता अगले तीन से चार महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।

यह अधिग्रहण केवल एक कंपनी खरीदने तक सीमित नहीं है। इसके साथ पोर्शे, टीसीएस और एमएचपी के बीच पांच साल की व्यापक साझेदारी भी होगी। इस साझेदारी के तहत पोर्शे ने टीसीएस और एमएचपी के लिए 1.25 अरब यूरो यानी करीब 14,000 करोड़ रुपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस राशि का इस्तेमाल वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग, परिचालन और ग्राहक अनुभव से जुड़े क्षेत्रों में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

एमएचपी वाहन और औद्योगिक क्षेत्र में परामर्श तथा सॉफ्टवेयर आधारित वाहन तकनीक के लिए जानी जाती है। कंपनी वाहन कंपनियों को कारोबार से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद करती है, जिसमें वाहन के कई महत्वपूर्ण काम सॉफ्टवेयर के जरिए संचालित होते हैं। टीसीएस के साथ जुड़ने के बाद इस विशेषज्ञता को बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग इस समय तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल ने पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के कारोबार को प्रभावित किया है। कई वैश्विक ग्राहक नई तकनीक पर खर्च बढ़ाने से पहले अपने पुराने तकनीकी खर्चों की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे समय में टीसीएस का वाहन तकनीक और एआई से जुड़े कारोबार में विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पोर्शे जर्मनी के वोक्सवैगन समूह का हिस्सा है। वोक्सवैगन समूह पर लागत घटाने और अपने कारोबार का दायरा सीमित करने का दबाव है। चीन की वाहन कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, आयात शुल्क और विद्युत वाहनों की बढ़ती लागत ने यूरोपीय वाहन उद्योग के सामने चुनौती बढ़ाई है।

बता दें कि पोर्शे ने इस साल स्पोर्ट्स कार कंपनियों बुगाटी और रिमाक में अपनी हिस्सेदारी भी बेची है। इसके अलावा कंपनी ने बैटरी इकाई सेलफोर्स और इलेक्ट्रिक साइकिल कारोबार समेत तीन सहायक कंपनियों को बंद किया है, जिससे 500 से अधिक नौकरियों पर असर पड़ा है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एमएचपी का अधिग्रहण टीसीएस के राजस्व में योगदान कर सकता है। सेंटरम ब्रोकिंग के सूचना प्रौद्योगिकी विश्लेषक पीयूष पांडे के अनुसार यह सौदा टीसीएस के पहले किए गए कुछ अधिग्रहणों जैसा है, जहां खरीदी गई कंपनियों के जरिए आगे कारोबार बढ़ाने की संभावना रहती है। उनका मानना है कि सौदे का टीसीएस के शेयर पर तत्काल बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे कंपनी की तकनीकी क्षमता और वाहन क्षेत्र में मौजूदगी मजबूत हो सकती है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार टीसीएस और पोर्शे की नई साझेदारी का मुख्य उद्देश्य वाहन उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सॉफ्टवेयर आधारित वाहन प्रणाली और डिजिटल तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करना है, जिससे दोनों कंपनियां बदलते वाहन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।

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