गोरखपुर के न्यू चिलमापुर कॉलोनी में देर शाम ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर आयोजित जलसा-ए-इस्लाह-ए-मुआशरा में मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश बुलंद हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया गया। जलसे की शुरुआत हाफिज आरिफ रजा की तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद सद्दाम खान और हाफिज आरिफ ने नात-ए-पाक पेश कर पूरे माहौल को रूहानियत से भर दिया, जिससे मौजूद लोग भावुक हो उठे। मुख्य वक्ता मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि समाज को बेहतर बनाने के लिए हर व्यक्ति को अपने घर और अपने व्यवहार से शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि सच्चाई, ईमानदारी, इंसाफ, बुजुर्गों का सम्मान और जरूरतमंदों की मदद जैसे गुण ही एक मजबूत और बेहतर समाज की पहचान हैं। पैगंबर की शिक्षाओं पर चलने का आह्वान उन्होंने कहा कि ईद मिलाद-उन-नबी सिर्फ जश्न का दिन नहीं, बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ﷺ के जीवन और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का मौका है। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही समाज में प्रेम, दया और इंसानियत को बढ़ाया जा सकता है। जलसे में युवाओं की भूमिका पर खास जोर दिया गया। अनस नक्शबंदी ने कहा कि युवा समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं, इसलिए उन्हें शिक्षा, अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। नशे, गलत संगत और बेवजह के विवादों से दूर रहकर अपने भविष्य और समाज की तरक्की में योगदान देना चाहिए। रिश्तों में मजबूती और आपसी समझदारी पर जोर वक्ताओं ने परिवार और पड़ोस के रिश्तों को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने के बजाय बातचीत और समझदारी से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। इससे समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द बढ़ता है। आयोजकों ने बताया कि ऐसे जलसों का मकसद सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि लोगों को अपने जीवन में अच्छे बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना भी है। अमन-शांति और भाईचारा बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका कार्यक्रम को सफल बनाने में इमरान भाई उर्फ इमू, खालिद, समीर रजा, अब्दुल अहद, सद्दाम, अतीकुर्रहमान, फैज अहमद, औसाफ अली, अल्यान रजा, मुजफ्फर हसनैन रूमी और शादाब सिद्दीकी सहित कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जलसे के समापन पर देश और समाज में अमन-चैन, भाईचारा और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की गई। मौजूद लोगों ने एक-दूसरे को मिलाद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

