अजमेर नगर निगम में दो बार भाजपा ये मेयर रह चुके धर्मेन्द्र गहलोत ने गत दिनों भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर आरोप लगाए। फिर से रविवार को गहलोत ने 6 मिनट 16 सैकंड का एक वीडियो जारी किया। इसमें 13 पत्रावलियों के मामले में अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर केवल अकेले को दोषी ठहराने को अनुचित बताया। साथ ही देवनानी से जुडे़ एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए शिकायत व फोटोज पोस्ट की और सच्चाई जनता के सामने लाने की अपील की। 6 मिनट 16 सैकंड का वीडियो किया जारी गहलोत ने वीडियो जारी कर कहा कि इन दिनों 13 फाइलों को लेकर काफी चर्चा है। वे प्रत्येक पत्रावली का विस्तृत जवाब बाद में देंगे, जिसकी उनकी पूरी तैयारी है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे जनता के सामने सच्चाई लाना चाहते हैं। जब यह आरोप सामने आया कि उन्हें दोषी पाया गया है, तो पार्टी (BJP) पर कोई आंच न आए, इसलिए उन्होंने खुद ही भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दिया। जब तक वे इस दाग से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते, तब तक भाजपा में शामिल नहीं होंगे। अकेले को दोषी ठहराना गलत गहलोत ने कहा कि भवन स्वीकृति से जुड़ी पत्रावलियां महापौर के स्तर पर स्वीकृति के लिए नहीं आती हैं और न ही इन पर उनके हस्ताक्षर हैं। जब कमिश्नर और उपायुक्त के बीच विवाद हुआ और कमिश्नर ने हटधर्मिता दिखाते हुए 13 व्यापारियों की पत्रावलियों को निरस्त कर दिया, तब जनप्रतिनिधि होने के नाते मैंने जनता के पक्ष में आवाज उठाई। मामला सरकार द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी के समक्ष गया, जिसमें कमिश्नर स्तर के अधिकारी, एक्सईएन, तकनीकी व विधि अधिकारी शामिल थे। एम्पावर्ड कमेटी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था। ऐसे में केवल उन्हें अकेले को दोषी ठहराना अनुचित है, जबकि कमेटी के किसी भी अन्य अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। साधारण सभा और 7 वर्षों से लंबित स्थिति सरकार ने इन फाइलों को अपने पास रखने के बाद कमिश्नर को साधारण सभा (बोर्ड) में रखने के निर्देश दिए। साधारण सभा में पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षद, तत्कालीन आईएएस अधिकारी चिन्मयी गोपाल तथा आरएएस अधिकारी मौजूद थे और सर्वसम्मति से निर्णय हुआ था। आज जो लोग इस मुद्दे को उछाल रहे हैं (जैसे चंद्रेश सांखला), वे भी उस बैठक में मौजूद थे और उपस्थिति रजिस्टर पर उनके हस्ताक्षर हैं; उन्होंने उस समय कोई विरोध नहीं किया। कमिश्नर द्वारा नोट ऑफ डिसेंट लगाने के बाद सरकार ने 26 अप्रैल 2019 को पुनः इसे साधारण सभा में रखने के निर्देश दिए थे। आज 7 साल बीत जाने के बाद भी वे पत्रावलियां साधारण सभा में नहीं रखी गईं और नगर निगम में अनिर्णित अवस्था में पड़ी हैं। जो फाइलें अंतिम रूप से निस्तारित ही नहीं हुईं, उनमें उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है। दबाव की राजनीति, कहा- सच्चाई सामने लाएं उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ यह पूरी कार्रवाई दबाव की राजनीति के तहत की जा रही है और इसका आरोप उन्होंने वासुदेव देवनानी पर लगाया। उन्होंने भाजपा नेता महेंद्र जादम और भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी का नाम लेते हुए कहा कि इन फाइलों की जानकारी उन्हें भी है और वे भी सच्चाई जनता के सामने लाएं। शिक्षा विभाग जुडे़ पुराने मामले का जिक्र किया गहलोत ने वासुदेव देवनानी के 2013 से 2018 तक शिक्षा मंत्री रहने के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कोटपुतली में कार्यरत विभाग के कर्मचारी दिनेश शर्मा (जो कथित रूप से ट्रांसफर गिरोह से जुड़े थे) ने विभागीय दबाव और वसूली के मामलों के चलते कार्यालय में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उस कर्मचारी की दो बेटियों ने प्रधानमंत्री तक इस मामले की शिकायत की थी, लेकिन प्रभाव का इस्तेमाल कर उस जांच को दबा दिया गया। उन्होंने मांग की कि इस पुराने प्रकरण की भी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
ये खबर भी पढे़ं… अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा छोड़ी:2 पुराने मामलों में नोटिस मिलने से नाराज; विधानसभा अध्यक्ष पर लगाए आरोप अजमेर में नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। 2 बार के मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने पार्टी छोड़ दी है। स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से 2 नोटिस दिए जाने से वह नाराज थे। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी आरोप लगाए। (पूरी खबर पढे)

