गयाजी में बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई नेता सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। बिना किसी कर्म के बड़े पदों पर बैठ जाते हैं। ऐसे लोग समाज और उसकी जमीनी सच्चाई को कभी नजदीक से नहीं देख पाते हैं। सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने सत्ता की लोलुपता और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए समाज के ताने-बाने को कमजोर किया है, उनसे किसी भी विषय पर चर्चा करने का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। अब देश और प्रदेश को जाति, धर्म या लिंग के नाम पर नहीं बांटा जा सकता। समाज को जोड़ने का वक्त आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन चार जातियों (गरीब, युवा, महिला और किसान) की बात कही है, उसे आज देश का हर बुद्धिजीवी स्वीकार कर रहा है। अब समाज में जाति का जहर घोलने की राजनीति बंद होनी चाहिए। अब सिर्फ जमात की बात होगी और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा ही आगे बढ़ेगा। खेत से बाजार तक: किसानों के लिए नई पहल कृषि विभाग की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार अब पुरानी परंपराओं से हटकर काम कर रही है। हमारा लक्ष्य किसान को सीधे ‘खेत से बाजार’ तक जोड़ना है। FPO की मजबूती: फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) को और अधिक सशक्त और मजबूत बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। कम पानी में बेहतर फसल: जल संकट से निपटने के लिए ‘लैब से लैंड’ तक की रणनीति अपनाई जा रही है। ऐसे बीजों और तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में भी फसल की पैदावार अच्छी हो और किसानों की आय में कोई कमी न आए। सीधी बुआई को बढ़ावा: मंत्री ने 33 एकड़ में बिना मोरी (बिना नर्सरी तैयार किए) सीधे धान की रोपनी के सफल प्रयोग का जिक्र किया। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मीडिया को भी इस खेत का दौरा कराएं ताकि अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल सके। 24 घंटे में होगी शिकायत पर कार्रवाई कृषि विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए मंत्री विजय सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी किसान को बीज, खाद या योजना से जुड़ी कोई शिकायत है, तो वह प्रमाण के साथ नाम और जगह की जानकारी दें। श्रमिकों और छोटे किसानों का उत्थान कृषि मजदूरों को श्रमिक का दर्जा देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान श्रमिक उत्थान पर है। एकीकृत खेती के माध्यम से 10 कट्टा, 1 बीघा या डेढ़ बीघा जमीन वाले छोटे किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। सिंचाई और विकास कार्यों की समीक्षा सिंचाई की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा और अन्य योजनाओं का पैसा अब सीधे किसानों के हित में और सिंचाई की प्राथमिकता के लिए उपयोग होगा। इसके अलावा, 3 सितंबर को बीस सूत्री की बैठक होगी। इसमें पितृपक्ष मेला, विष्णुपद कॉरिडोर, महाबोधि कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े विकास कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी। गयाजी में बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई नेता सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। बिना किसी कर्म के बड़े पदों पर बैठ जाते हैं। ऐसे लोग समाज और उसकी जमीनी सच्चाई को कभी नजदीक से नहीं देख पाते हैं। सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने सत्ता की लोलुपता और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए समाज के ताने-बाने को कमजोर किया है, उनसे किसी भी विषय पर चर्चा करने का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। अब देश और प्रदेश को जाति, धर्म या लिंग के नाम पर नहीं बांटा जा सकता। समाज को जोड़ने का वक्त आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन चार जातियों (गरीब, युवा, महिला और किसान) की बात कही है, उसे आज देश का हर बुद्धिजीवी स्वीकार कर रहा है। अब समाज में जाति का जहर घोलने की राजनीति बंद होनी चाहिए। अब सिर्फ जमात की बात होगी और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा ही आगे बढ़ेगा। खेत से बाजार तक: किसानों के लिए नई पहल कृषि विभाग की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार अब पुरानी परंपराओं से हटकर काम कर रही है। हमारा लक्ष्य किसान को सीधे ‘खेत से बाजार’ तक जोड़ना है। FPO की मजबूती: फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) को और अधिक सशक्त और मजबूत बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। कम पानी में बेहतर फसल: जल संकट से निपटने के लिए ‘लैब से लैंड’ तक की रणनीति अपनाई जा रही है। ऐसे बीजों और तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में भी फसल की पैदावार अच्छी हो और किसानों की आय में कोई कमी न आए। सीधी बुआई को बढ़ावा: मंत्री ने 33 एकड़ में बिना मोरी (बिना नर्सरी तैयार किए) सीधे धान की रोपनी के सफल प्रयोग का जिक्र किया। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मीडिया को भी इस खेत का दौरा कराएं ताकि अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल सके। 24 घंटे में होगी शिकायत पर कार्रवाई कृषि विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए मंत्री विजय सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी किसान को बीज, खाद या योजना से जुड़ी कोई शिकायत है, तो वह प्रमाण के साथ नाम और जगह की जानकारी दें। श्रमिकों और छोटे किसानों का उत्थान कृषि मजदूरों को श्रमिक का दर्जा देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान श्रमिक उत्थान पर है। एकीकृत खेती के माध्यम से 10 कट्टा, 1 बीघा या डेढ़ बीघा जमीन वाले छोटे किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। सिंचाई और विकास कार्यों की समीक्षा सिंचाई की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मनरेगा और अन्य योजनाओं का पैसा अब सीधे किसानों के हित में और सिंचाई की प्राथमिकता के लिए उपयोग होगा। इसके अलावा, 3 सितंबर को बीस सूत्री की बैठक होगी। इसमें पितृपक्ष मेला, विष्णुपद कॉरिडोर, महाबोधि कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े विकास कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।

