बेगूसराय में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 61 सेंटीमीटर ऊपर चला गया है। फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरा के निशान 41.76 को पार कर 42.37 पर है। नदी का जलस्तर प्रत्येक घंटे 2 सेंटीमीटर की भयावह रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर में हो रही इस वृद्धि ने बेगूसराय जिले के तटीय और दियारा इलाकों में तबाही मचाना शुरू कर दिया है। 5 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर लगी फसल जलमग्न हो चुकी है। खेतों में खड़ी मकई और हरा चारा डूब जाने से किसानों की मेहनत पानी में चली गई है। बढ़ते जलस्तर के कारण अब बाढ़ का पानी मुख्य सड़कों पर चढ़ने लगा है। बाढ़ का सबसे विकराल प्रभाव चमथा दियारा इलाके में देखने को मिल रहा है। उफनती गंगा के कारण लोदियाही और विशनपुर गांव टापू में तब्दील हो चुका है। 5 हजार से अधिक ग्रामीणों का सड़क संपर्क थाना, प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह से टूट गया है। मुख्य मार्गों और संपर्क पथों पर कई-कई फीट पानी बह रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर की तीन तस्वीरें देखिए… जान जोखिम में डालकर लोग कर रहे सफर गांव के लोगों के पास आवागमन और दैनिक जरूरतों के लिए केवल और केवल नाव ही एकमात्र सहारा बची है। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय बाजारों तक पहुंचने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर या नावों की सवारी करनी पड़ रही है। जिससे लोग काफी परेशान हैं। तेघड़ा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध अयोध्या गंगा घाट पर स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। गंगा के तट पर स्थित करीब 50 दुकानें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। बाढ़ के कारण घाट पर स्थित श्मशान जलमग्न हो चुका है। स्थिति यह है कि अंतिम संस्कार करने के लिए शव, चिता की लकड़ियां और पूजन सामग्री सब कुछ नाव पर लादकर पानी के बीच सुरक्षित स्थानों या बचे हुए ऊंचे हिस्सों तक ले जाना पड़ रहा है। अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोग भी नावों के सहारे ही शोक संतप्त होकर गंगा तट की ओर बढ़ने को मजबूर हैं। दैनिक भास्कर ने जब अयोध्या घाट छोड़कर पास के बांध पर तिरपाल लगाकर अस्थाई दुकान चला रहे पीड़ितों से बातचीत की, तो उनका दर्द छलक पड़ा। हिमांशु कुमार और रेखा देवी पिछले 7 वर्षों से यहां अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। ‘4 दिन पहले अचानक पानी बढ़ा और हमारी दुकान पूरी तरह डूब गई’ हिमांशु कुमार ने बताया कि हम लोग लखीसराय से आकर पिछले 7 साल से अयोध्या घाट पर दुकान चला रहे हैं। 4 दिन पहले अचानक पानी बढ़ा और हमारी दुकान पूरी तरह डूब गई। हम लोग जान-माल बचाकर बांध पर चले आए और बांस-तिरपाल लगाकर दुकान खोली है। पहले रोजाना 15 सौ रुपये की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब दिनभर में 300 रुपये भी नहीं बनते। रेखा देवी ने बताया कि दुकान में पानी घुस गया, सब डूब गया। 4 दिनों से बांध पर जैसे-तैसे रह रहे हैं। रात-दिन पानी बढ़ ही रहा है, घटने का नाम नहीं ले रहा। बिक्री एकदम ठप है, केवल भोजन चलाने लायक ही पैसे निकल पा रहे हैं। न कोई समाजसेवी आया और न ही कोई सरकारी लोग। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। दियारा इलाके के लोगों का सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू बेगूसराय जिले में गंगा का बाढ़ क्षेत्र काफी विस्तृत है। जिले के सात प्रमुख प्रखंडों बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, शाम्हो, बलिया एवं साहेबपुर कमाल के दियारा इलाकों के साथ-साथ नगर निगम का निचली आबादी वाला क्षेत्र भी गंगा की बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित होता है। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए दियारा क्षेत्र के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल और बेगूसराय जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहने का दावा कर रहा है। डीएम ने कहा है कि जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में जिले के 8 अंचलों की 37 पंचायतें और 2 नगर निकाय संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं। बेगूसराय में 80 बाढ़ राहत शिविर, प्रभावितों के लिए 21 सरकारी, 239 प्राइवेट नाव तैयार इसके मद्देनजर जिले में 80 बाढ़ राहत शिविर एवं प्रभावित लोगों के लिए 228 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं। ड्राई राशन पैकेट तैयार करने के लिए 26 स्थल तथा आपात स्थिति में उपयोग के लिए 18 हेलीपैड स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए जिले में 21 सरकारी नाव, 239 निजी नाव एवं 7 मोटरबोट सहित 267 नाव तैयार है। 92 प्रशिक्षित गोताखोर एवं 100 राहत दल गठित किए गए हैं। जिले में 36450 पॉलिथीन शीट्स उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए 62 मेडिकल टीमें बनाई गई है। अस्पताल में 122 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध है। पशुओं की सुरक्षा एवं उपचार के लिए 52 पशु शरण स्थल चिन्हित किए गए हैं, 44 प्रकार की पशु दवाओं के साथ 25 सौ क्विंटल पशुचारा (भूसा) का भंडारण किया गया है। सभी सीओ, अभियंता और संबंधित पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अलर्ट शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए टैंकरों एवं अस्थायी नल-जल व्यवस्था की तैयारी की गई है। ग्रामीण एवं कृषि फीडरों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा खराब ट्रांसफॉर्मर को तत्काल बदलने के लिए पर्याप्त स्पेयर ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध हैं। सभी सीओ, अभियंता और संबंधित पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अलर्ट रखा गया है। फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरा के निशान 41.76 को पार कर 42.22 पर है। दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से उफनती गंगा नदी यदि इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो आने वाले 48 घंटे बेगूसराय के लिए बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं। प्रशासन को फाइलों से निकलकर वास्तविक पीड़ितों तक तुरंत राहत सामग्री पहुंचानी होगी। बेगूसराय में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 61 सेंटीमीटर ऊपर चला गया है। फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरा के निशान 41.76 को पार कर 42.37 पर है। नदी का जलस्तर प्रत्येक घंटे 2 सेंटीमीटर की भयावह रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर में हो रही इस वृद्धि ने बेगूसराय जिले के तटीय और दियारा इलाकों में तबाही मचाना शुरू कर दिया है। 5 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर लगी फसल जलमग्न हो चुकी है। खेतों में खड़ी मकई और हरा चारा डूब जाने से किसानों की मेहनत पानी में चली गई है। बढ़ते जलस्तर के कारण अब बाढ़ का पानी मुख्य सड़कों पर चढ़ने लगा है। बाढ़ का सबसे विकराल प्रभाव चमथा दियारा इलाके में देखने को मिल रहा है। उफनती गंगा के कारण लोदियाही और विशनपुर गांव टापू में तब्दील हो चुका है। 5 हजार से अधिक ग्रामीणों का सड़क संपर्क थाना, प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह से टूट गया है। मुख्य मार्गों और संपर्क पथों पर कई-कई फीट पानी बह रहा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर की तीन तस्वीरें देखिए… जान जोखिम में डालकर लोग कर रहे सफर गांव के लोगों के पास आवागमन और दैनिक जरूरतों के लिए केवल और केवल नाव ही एकमात्र सहारा बची है। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय बाजारों तक पहुंचने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर या नावों की सवारी करनी पड़ रही है। जिससे लोग काफी परेशान हैं। तेघड़ा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध अयोध्या गंगा घाट पर स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। गंगा के तट पर स्थित करीब 50 दुकानें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। बाढ़ के कारण घाट पर स्थित श्मशान जलमग्न हो चुका है। स्थिति यह है कि अंतिम संस्कार करने के लिए शव, चिता की लकड़ियां और पूजन सामग्री सब कुछ नाव पर लादकर पानी के बीच सुरक्षित स्थानों या बचे हुए ऊंचे हिस्सों तक ले जाना पड़ रहा है। अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोग भी नावों के सहारे ही शोक संतप्त होकर गंगा तट की ओर बढ़ने को मजबूर हैं। दैनिक भास्कर ने जब अयोध्या घाट छोड़कर पास के बांध पर तिरपाल लगाकर अस्थाई दुकान चला रहे पीड़ितों से बातचीत की, तो उनका दर्द छलक पड़ा। हिमांशु कुमार और रेखा देवी पिछले 7 वर्षों से यहां अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। ‘4 दिन पहले अचानक पानी बढ़ा और हमारी दुकान पूरी तरह डूब गई’ हिमांशु कुमार ने बताया कि हम लोग लखीसराय से आकर पिछले 7 साल से अयोध्या घाट पर दुकान चला रहे हैं। 4 दिन पहले अचानक पानी बढ़ा और हमारी दुकान पूरी तरह डूब गई। हम लोग जान-माल बचाकर बांध पर चले आए और बांस-तिरपाल लगाकर दुकान खोली है। पहले रोजाना 15 सौ रुपये की बिक्री हो जाती थी, लेकिन अब दिनभर में 300 रुपये भी नहीं बनते। रेखा देवी ने बताया कि दुकान में पानी घुस गया, सब डूब गया। 4 दिनों से बांध पर जैसे-तैसे रह रहे हैं। रात-दिन पानी बढ़ ही रहा है, घटने का नाम नहीं ले रहा। बिक्री एकदम ठप है, केवल भोजन चलाने लायक ही पैसे निकल पा रहे हैं। न कोई समाजसेवी आया और न ही कोई सरकारी लोग। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। दियारा इलाके के लोगों का सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू बेगूसराय जिले में गंगा का बाढ़ क्षेत्र काफी विस्तृत है। जिले के सात प्रमुख प्रखंडों बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, शाम्हो, बलिया एवं साहेबपुर कमाल के दियारा इलाकों के साथ-साथ नगर निगम का निचली आबादी वाला क्षेत्र भी गंगा की बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित होता है। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए दियारा क्षेत्र के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल और बेगूसराय जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहने का दावा कर रहा है। डीएम ने कहा है कि जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में जिले के 8 अंचलों की 37 पंचायतें और 2 नगर निकाय संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं। बेगूसराय में 80 बाढ़ राहत शिविर, प्रभावितों के लिए 21 सरकारी, 239 प्राइवेट नाव तैयार इसके मद्देनजर जिले में 80 बाढ़ राहत शिविर एवं प्रभावित लोगों के लिए 228 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं। ड्राई राशन पैकेट तैयार करने के लिए 26 स्थल तथा आपात स्थिति में उपयोग के लिए 18 हेलीपैड स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए जिले में 21 सरकारी नाव, 239 निजी नाव एवं 7 मोटरबोट सहित 267 नाव तैयार है। 92 प्रशिक्षित गोताखोर एवं 100 राहत दल गठित किए गए हैं। जिले में 36450 पॉलिथीन शीट्स उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए 62 मेडिकल टीमें बनाई गई है। अस्पताल में 122 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध है। पशुओं की सुरक्षा एवं उपचार के लिए 52 पशु शरण स्थल चिन्हित किए गए हैं, 44 प्रकार की पशु दवाओं के साथ 25 सौ क्विंटल पशुचारा (भूसा) का भंडारण किया गया है। सभी सीओ, अभियंता और संबंधित पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अलर्ट शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए टैंकरों एवं अस्थायी नल-जल व्यवस्था की तैयारी की गई है। ग्रामीण एवं कृषि फीडरों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा खराब ट्रांसफॉर्मर को तत्काल बदलने के लिए पर्याप्त स्पेयर ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध हैं। सभी सीओ, अभियंता और संबंधित पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अलर्ट रखा गया है। फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरा के निशान 41.76 को पार कर 42.22 पर है। दो सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से उफनती गंगा नदी यदि इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो आने वाले 48 घंटे बेगूसराय के लिए बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं। प्रशासन को फाइलों से निकलकर वास्तविक पीड़ितों तक तुरंत राहत सामग्री पहुंचानी होगी।

