मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर में नकली ज्यूडिशियल स्टांप, वेलफेयर टिकट और कोर्ट फीस स्टांप बेचने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार शाम तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद शनिवार को तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले में अब पुलिस गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच अधिकारी मुन्ना कुमार ने बताया कि रिमांड पर आरोपितों से यह पता लगाया जाएगा कि नकली स्टांप का खेल कब से चल रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच में ‘स्कैम 2003 : द तेलगी स्टोरी’ का एंगल भी सामने आया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों के वेब सीरीज देखने के बाद शॉर्टकट में पैसा कमाने के लिए नकली स्टांप के धंधे का प्लान बनाने की बात सामने आने की चर्चा है। हालांकि, पुलिस अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित वास्तव में वेब सीरीज से प्रभावित हुए थे या पहले से किसी नेटवर्क के संपर्क में थे। 100 का नकली स्टांप 20 रुपए में खरीदने का आरोप पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 100 रुपये का नकली ज्यूडिशियल स्टांप करीब 20 रुपये में खरीदा जाता था और उसे असली बताकर बेचने का आरोप है। इसी तरह 50 रुपये का वेलफेयर टिकट करीब 10 रुपये में खरीदकर आगे खपाने की बात सामने आई है। आरोप है कि असली स्टांप की स्कैन कॉपी से नकली स्टांप तैयार कर बाजार में खपाए जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली स्टांप तैयार कहां किए जाते थे और आरोपितों तक इनकी सप्लाई कौन करता था। पुलिस के अनुसार, मुरारी कुमार की दुकान से 100 रुपये मूल्य के 12 नकली ज्यूडिशियल स्टांप भी बरामद किए गए हैं। बार अध्यक्ष को स्टांप देखकर हुआ शक मामले का खुलासा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण ठाकुर उर्फ रामबाबू ठाकुर के पास एक व्यक्ति के एफिडेविट के लिए पहुंचने के बाद हुआ। अध्यक्ष ने अपने जूनियर को ज्यूडिशियल स्टांप खरीदने के लिए सत्यम की दुकान पर भेजा था। स्टांप लेकर लौटने के बाद अध्यक्ष को उसकी वास्तविकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने खुद दुकान पर पहुंचकर स्टांप के बारे में पूछताछ की। मामला सामने आने पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसकी जानकारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और प्रशासन को दी। इसके बाद नगर थाने में चार दुकानदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। चार दुकानदारों पर केस, तीन जेल गए मामले में मुरारी कुमार, प्रभात कुमार, राजेश कुमार और सत्यम को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने शुक्रवार शाम मुरारी कुमार, प्रभात कुमार और राजेश कुमार को गिरफ्तार किया। तीनों से पूछताछ के बाद शनिवार को जेल भेज दिया गया। वहीं, सत्यम की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मामले में पुलिस ने चार अन्य संदिग्धों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इनसे नकली स्टांप की सप्लाई और इस धंधे से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। रिमांड में पूछेगी पुलिस- कब से चल रहा था खेल आईओ मुन्ना कुमार ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस उनसे यह जानने की कोशिश करेगी कि वे कब से नकली स्टांप का खेल कर रहे थे। नकली स्टांप कहां से आते थे, इसे कौन उपलब्ध कराता था और इसे तैयार करने वाला कौन है, इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ होगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इस पूरे खेल का बड़ा सरगना कौन है। रिमांड के दौरान आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ेगी और नकली स्टांप के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास करेगी। ‘स्कैम 2003’ से प्रेरणा वाले एंगल की भी जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी। मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर में नकली ज्यूडिशियल स्टांप, वेलफेयर टिकट और कोर्ट फीस स्टांप बेचने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार शाम तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद शनिवार को तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले में अब पुलिस गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच अधिकारी मुन्ना कुमार ने बताया कि रिमांड पर आरोपितों से यह पता लगाया जाएगा कि नकली स्टांप का खेल कब से चल रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच में ‘स्कैम 2003 : द तेलगी स्टोरी’ का एंगल भी सामने आया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों के वेब सीरीज देखने के बाद शॉर्टकट में पैसा कमाने के लिए नकली स्टांप के धंधे का प्लान बनाने की बात सामने आने की चर्चा है। हालांकि, पुलिस अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित वास्तव में वेब सीरीज से प्रभावित हुए थे या पहले से किसी नेटवर्क के संपर्क में थे। 100 का नकली स्टांप 20 रुपए में खरीदने का आरोप पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 100 रुपये का नकली ज्यूडिशियल स्टांप करीब 20 रुपये में खरीदा जाता था और उसे असली बताकर बेचने का आरोप है। इसी तरह 50 रुपये का वेलफेयर टिकट करीब 10 रुपये में खरीदकर आगे खपाने की बात सामने आई है। आरोप है कि असली स्टांप की स्कैन कॉपी से नकली स्टांप तैयार कर बाजार में खपाए जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली स्टांप तैयार कहां किए जाते थे और आरोपितों तक इनकी सप्लाई कौन करता था। पुलिस के अनुसार, मुरारी कुमार की दुकान से 100 रुपये मूल्य के 12 नकली ज्यूडिशियल स्टांप भी बरामद किए गए हैं। बार अध्यक्ष को स्टांप देखकर हुआ शक मामले का खुलासा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण ठाकुर उर्फ रामबाबू ठाकुर के पास एक व्यक्ति के एफिडेविट के लिए पहुंचने के बाद हुआ। अध्यक्ष ने अपने जूनियर को ज्यूडिशियल स्टांप खरीदने के लिए सत्यम की दुकान पर भेजा था। स्टांप लेकर लौटने के बाद अध्यक्ष को उसकी वास्तविकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने खुद दुकान पर पहुंचकर स्टांप के बारे में पूछताछ की। मामला सामने आने पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसकी जानकारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और प्रशासन को दी। इसके बाद नगर थाने में चार दुकानदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। चार दुकानदारों पर केस, तीन जेल गए मामले में मुरारी कुमार, प्रभात कुमार, राजेश कुमार और सत्यम को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने शुक्रवार शाम मुरारी कुमार, प्रभात कुमार और राजेश कुमार को गिरफ्तार किया। तीनों से पूछताछ के बाद शनिवार को जेल भेज दिया गया। वहीं, सत्यम की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मामले में पुलिस ने चार अन्य संदिग्धों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इनसे नकली स्टांप की सप्लाई और इस धंधे से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। रिमांड में पूछेगी पुलिस- कब से चल रहा था खेल आईओ मुन्ना कुमार ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस उनसे यह जानने की कोशिश करेगी कि वे कब से नकली स्टांप का खेल कर रहे थे। नकली स्टांप कहां से आते थे, इसे कौन उपलब्ध कराता था और इसे तैयार करने वाला कौन है, इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ होगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इस पूरे खेल का बड़ा सरगना कौन है। रिमांड के दौरान आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ेगी और नकली स्टांप के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास करेगी। ‘स्कैम 2003’ से प्रेरणा वाले एंगल की भी जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

