कांग्रेस (Congress) नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह एक छात्रा विशेष कार्यक्रम ‘बंदिशों का पिंजरा तोड़ो’ था। इस दौरान छात्राओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज लड़ाई इसी सोच के खिलाफ है। राहुल ने कहा, “मनुस्मृति में महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में बेटे के अधीन रहने की बात कही गई है। महिला को केवल बेटी, पत्नी या मां की पहचान तक सीमित नहीं किया जा सकता। उसे अपनी पहचान खुद तय करने और अपनी शर्तों पर जीवन जीने का अधिकार है।”
बीजेपी-आरएसएस पर लगाया बड़ा आरोप
राहुल ने बीजेपी (BJP) और आरएसएस (RSS) पर लड़कियों को ‘पिंजरे’ में रखने की मानसिकता का आरोप लगाया। उन्होंने करीब 70 करोड़ महिलाओं के सपनों और यात्राओं को देश की बड़ी ताकत बताया। मंच पर बोलते हुए राहुल ने ‘गर्ल पावर’ बैज भी अपनी टी-शर्ट पर लगाया।
लड़के गाली दें तो सामान्य, लड़की दे तो ‘कल्चरल शॉक’
राहुल ने कहा कि समाज महिलाओं के लिए अलग नैतिक पैमाने बनाता है। लड़का रात में बाहर रहे तो सामान्य, लड़की के लिए पाबंदियाँ और शादी की याद दिलाई जाती है। कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने भी पढ़ाई और स्वतंत्रता में आने वाली पारिवारिक बंदिशें साझा कीं। तेजस्विनी ने बताया कि पांच साल से नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी। शेख आमना ने कहा कि पढ़ी-लिखी लड़की के आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने से नियंत्रण खत्म होने का डर रहता है।
आंकड़े दिखाते हैं महिलाओं की चुनौतियाँ
कार्यक्रम में राहुल ने आंकड़े दिखाते हुए बताया कि महिलाएं घर में औसतन 5.5 घंटे काम करती हैं तो वहीँ पुरुष सिर्फ 30 मिनट ही काम करते हैं। 84% महिलाओं को काम के लिए अनुमति लेनी पड़ती है और 60% अकेले बाहर नहीं जा सकतीं। 45% लड़कियों को शादी-घर की ज़िम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ती हैं, जबकि सिर्फ 8% महिलाओं के पास जमीन का मालिकाना हक होता है। राहुल ने इस बात का भी दावा किया कि महिलाओं को पुरुषों से 25% कम वेतन मिलता है।

