खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की जद में आए फाइव स्टार सयाजी को शनिवार देर शाम हाईकोर्ट की इंदौर बैंच से बड़ी राहत मिल गई। अर्जेंट हियरिंग के दौरान कोर्ट ने होटल की रसोई तत्काल खोलने के निर्देश दिए और 21 अगस्त को खाद्य लाइसेंस निलंबित करने के प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने माना कि सामने आई कमियों को दूर करने के लिए होटल को पहले सुधार नोटिस देकर निर्धारित समय देना जरूरी था। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी कार्रवाई के आधार पर जिला प्रशासन ने शनिवार को होटल के एफएल-3 बार लाइसेंस को भी निलंबित कर दिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस कार्रवाई का आधार भी प्रभावित हुआ है। 24 बिंदुओं पर मिली थीं खामियां
जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त जांच में सयाजी होटल के किचन और खाद्य सामग्री में कई अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया था। प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान करीब 24 बिंदुओं पर कमियां मिली थीं। इनमें बिना निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बैच नंबर वाले पैक्ड खाद्य पदार्थ,एक्सपायरी डेट वाले उबले आलू, फफूंद लगी मूंगफली, दीमक, घुन और मक्खी लगे चने, किचन में कॉकरोच और चूहों की मौजूदगी, खाद्य सामग्री के रखरखाव में स्वच्छता मानकों की कमी जैसी बातें सामने आने का प्रशासन ने दावा किया था। प्रशासन का तर्क था कि ऐसी परिस्थितियों में ग्राहकों को असुरक्षित और मानकों के विपरीत खाद्य पदार्थ परोसे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। होटल की दलील; सीधे लाइसेंस निलंबित नहीं कर सकते थे सयाजी होटल की ओर से सीनियर एडवोकेट सुमित नेमा, अरुण द्विवेदी और याशिका बोंडवाल ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 और संबंधित विनियमों के तहत कमियां मिलने पर सीधे लाइसेंस निलंबित करने के बजाय पहले सुधार नोटिस जारी किया जाना चाहिए था। होटल की ओर से कहा गया कि जिन कमियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें दूर करने के लिए होटल को अवसर दिया जाना चाहिए था। इसके लिए नियमानुसार समय भी दिया जाना जरूरी था। सुधार का मौका दिए बिना सीधे निलंबन उचित नहीं कोर्ट ने कहा कि खाद्य पदार्थों पर निर्माण या समाप्ति तिथि और बैच नंबर का न होना अथवा खाद्य सामग्री का कॉकरोच और चूहों के बीच पाया जाना अपने आप में ऐसा आधार नहीं है, जिससे बिना सुधार का अवसर दिए लाइसेंस निलंबित कर दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि होटल को कमियां दूर करने के लिए धारा 32 के तहत अवसर दिया जाना आवश्यक था। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रशासन के आदेश में ऐसे पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं, जिनसे यह साबित हो कि जनस्वास्थ्य के हित में लाइसेंस को सीधे निलंबित करना जरूरी था। इसी आधार पर कोर्ट ने 21 अगस्त के आदेश पर रोक लगाते हुए होटल की रसोई तत्काल खोलने के निर्देश दिए। प्रशासन ने बार लाइसेंस किया निलंबित
इधर, प्रशासन ने 22 अगस्त को सयाजी होटल का होटल बार (एफएल-3) लाइसेंसनिलंबित कर दिया। प्रशासन ने इसके लिए खाद्य लाइसेंस के निलंबन को आधार बनाया। आबकारी विभाग के अनुसार बार लाइसेंस की शर्तों के तहत संबंधित प्रतिष्ठान के पास खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत वैध खाद्य अनुज्ञप्ति होना जरूरी है। खाद्य लाइसेंस निलंबित होने के बाद बार लाइसेंस की निर्धारित शर्तों का उल्लंघन माना गया और आबकारी अधिनियम की धारा 31(1) के तहत कार्रवाई की गई। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद बार लाइसेंस की कार्रवाई पर भी नजर
एक ही कार्रवाई से जुड़े दो स्तर अब सामने आ गए हैं। एक ओर जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा कार्रवाई के आधार पर होटल का बार लाइसेंस निलंबित किया, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट ने खाद्य लाइसेंस निलंबन के मूल आदेश पर ही रोक लगा दी है और किचन खोलने के निर्देश दिए हैं। CKD गार्डन-रेस्टोरेंट में खाद्य सुरक्षा टीम की जांच, 4 सैंपल लिए
इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने शनिवार को निरंजनपुर स्थित सीकेडी गार्डन एंड रेस्टारेंट का निरीक्षण किया। तहसीलदार सपना शर्मा और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त टीम ने किचन व स्टोर रूम की जांच की। इस दौरान डीप फ्रीजर में वेज-नॉनवेज खाद्य पदार्थ एक साथ रखने, खाद्य पदार्थों को पैलेट के बिना रखने और खाद्य सामग्री के साथ अखाद्य वस्तुओं के भंडारण जैसी कमियां मिलीं। इसके अलावा पानी की जांच रिपोर्ट, कर्मचारियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र और पेस्ट कंट्रोल रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिले। टीम ने पनीर, काजू, तुअर दाल और घी के 4 सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। कमियों को दूर करने के लिए संचालक को इंप्रूवमेंट नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

