मेरा फोकस सिर्फ ट्रॉफी जीतने पर है, बुराई से मुझे फर्क नहीं पड़ता- गौतम गंभीर ने आलोचकों को दिया जवाब

मेरा फोकस सिर्फ ट्रॉफी जीतने पर है, बुराई से मुझे फर्क नहीं पड़ता- गौतम गंभीर ने आलोचकों को दिया जवाब

Gautam Gambhir: भारतीय टीम के प्रदर्शन और लगातार खराब नतीजों के बाद टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा कि बाहरी हल्ला- गुल्ला से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उनका फोकस सिर्फ टीम इंडिया को जीत दिलाने में है। 

Gautam Gambhir Controversy: भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट से पहले गौतम गंभीर ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर हो रही आलोचना के बीच गंभीर का रवैया बिल्कुल साफ नजर आया। उन्होंने बाहरी शोर, सोशल मीडिया की चर्चा और रैंकिंग को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे जरूरी भारतीय टीम की जीत है।

ट्रॉफी जीतने पर हमारा फोकस है…

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब गंभीर से उनकी आलोचना को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेबाक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें व्यूज और लाइक्स की परवाह नहीं है। वह सिर्फ ट्रॉफी जीतने में विश्वास रखते हैं। वह बाहर की चर्चाओं से प्रभावित होकर अपने फैसले नहीं लेते।

बता दें भारत ने पहले टेस्ट में श्रीलंका को 165 रन से हराया था। अब दोनों टीमों के बीच दूसरा और आखिरी टेस्ट खेला जाना है। ऐसे में गंभीर की नजरें सीरीज जीतने पर है। वह आलोचनाओं के बजाय मैदान पर टीम के प्रदर्शन को अहम मानते हैं।

रैंकिंग से ज्यादा जरूरी टीम की सही दिशा

इस बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भारत की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। टीम की रैंकिंग पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। हालांकि, गंभीर ने इसे बड़ी चिंता नहीं माना।

उन्होंने कहा कि भारत टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रहा है। टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है। उतार-चढ़ाव आते हैं। भारत ने इंग्लैंड दौरे के बाद काफी हद तक अच्छा क्रिकेट खेला है। मीडिया और कमेंट्री बॉक्स में बैठे लोग रैंकिंग पर ध्यान दे सकते हैं। लेकिन टीम ऐसा नहीं करती। भारतीय टीम को भरोसा है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

अगरकर से बातचीत और तीन टेस्ट की सीरीज की पैरवी

गंभीर ने चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के साथ अपनी बातचीत को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं का मकसद भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाना है। टीम चाहती है कि उसके सबसे अच्छे खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा मैच खेलें। इससे टीम में निरंतरता बनी रहेगी। खिलाड़ियों के वर्कलोड और चोटों को लेकर भी लगातार चर्चा होती है। तेज गेंदबाजों को जरूरत के हिसाब से आराम दिया जाता है।

गंभीर ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर एक और बड़ी बात कही। वह दो मैचों की बजाय तीन मैचों की सीरीज चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर कोई टीम पहला टेस्ट हार जाती है, तो उसके पास वापसी का पर्याप्त मौका होना चाहिए। दो टेस्ट की सीरीज में पहला मैच हारने के बाद अधिकतम सीरीज ड्रॉ करने का मौका बचता है। वहीं, तीन मैचों की सीरीज में मुकाबला ज्यादा रोमांचक हो सकता है।

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