नालंदा के बाजारों में चीनी, तेल की कीमत में उछाल:सूखे के असर से सब्जियों के दाम भी आसमान पर, रसोई का बिगड़ा बजट

नालंदा के बाजारों में चीनी, तेल की कीमत में उछाल:सूखे के असर से सब्जियों के दाम भी आसमान पर, रसोई का बिगड़ा बजट

नालंदा के शहरी और ग्रामीण बाजारों में रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अचानक आए उछाल ने आम जनता की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। बीते 10 से 15 दिनों के भीतर खुदरा बाजार में चीनी और खाद्य तेलों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके साथ ही पर्याप्त बारिश न होने और सूखे जैसे हालात के चलते हरी सब्जियों की आवक घटने से उनकी कीमतों में भी भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। लगातार बढ़ रही इस महंगाई के कारण मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है, जिससे बाजार में खरीदारों और दुकानदारों दोनों की परेशानी बढ़ गई है। किराना बाजार में चीनी और रिफाइंड तेल में तेजी जिले के स्थानीय किराना बाजारों में चीनी की कीमतों में पिछले 10 दिनों के भीतर 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। किराना दुकानदार भोला साह ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि थोक मंडियों से ही माल ऊंची दरों पर मिल रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में बढ़े हुए दामों पर सामान बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई का दबाव झेल रहे ग्राहक जब दुकान पर आते हैं, तो बढ़ी हुई कीमतें सुनकर नाराजगी जताते हैं और कई बार बिना खरीदारी किए ही लौट जाते हैं। चीनी के अलावा रिफाइंड तेल और सरसों तेल के दामों में भी प्रति लीटर दस से पंद्रह रुपये की तेजी आई है। दुकानदारों का कहना है कि यह मूल्यवृद्धि उनके हाथ में नहीं है, बल्कि थोक आपूर्ति और व्यापक बाजार नीतियों पर निर्भर करती है। बारिश की कमी से सब्जी मंडियों पर पड़ा सीधा असर किराना सामान के साथ-साथ जिले की सब्जी मंडियों में भी मौसमी मार साफ दिखाई दे रही है। सब्जी विक्रेता रवींद्र कुमार ने बताया कि इस बार जिले में सामान्य बारिश नहीं होने और सूखे की स्थिति बने रहने से खेतों में सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बाहर से आने वाली आवक कम होने के कारण हरी सब्जियों के भाव चढ़ गए हैं। पहले चालीस रुपये प्रति किलो बिकने वाला परवल अब साठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह बैंगन के दामों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं प्याज और लहसुन की कीमतों में भी इज़ाफ़ा हुआ है। प्याज प्रति किलो 55-60 और लहसून 100-150 रुपये प्रति किलों मिल रहा है। आम उपभोक्ताओं में गहरा रोष, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग बाजार में खरीदारी करने पहुंचे स्थानीय उपभोक्ता कमलेश पांडे ने बेलगाम होती महंगाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। ग्राहकों का कहना है कि एक तरफ दाल और अनाज की कीमतें पहले से ही अधिक थीं, वहीं अब चीनी, तेल और हरी सब्जियों के महंगे होने से महीने का पूरा खर्च असंतुलित हो गया है। लोगों का मानना है कि बुनियादी वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतें आम आदमी की जेब पर सीधा डाका डाल रही हैं। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन तथा सरकार से मांग की है कि आवश्यक खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी और मनमानी मूल्यवृद्धि पर तुरंत अंकुश लगाने के लिए बाजारों में नियमित निगरानी और सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को बढ़ती महंगाई से फौरी राहत मिल सके। नालंदा के शहरी और ग्रामीण बाजारों में रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अचानक आए उछाल ने आम जनता की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। बीते 10 से 15 दिनों के भीतर खुदरा बाजार में चीनी और खाद्य तेलों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके साथ ही पर्याप्त बारिश न होने और सूखे जैसे हालात के चलते हरी सब्जियों की आवक घटने से उनकी कीमतों में भी भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। लगातार बढ़ रही इस महंगाई के कारण मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है, जिससे बाजार में खरीदारों और दुकानदारों दोनों की परेशानी बढ़ गई है। किराना बाजार में चीनी और रिफाइंड तेल में तेजी जिले के स्थानीय किराना बाजारों में चीनी की कीमतों में पिछले 10 दिनों के भीतर 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। किराना दुकानदार भोला साह ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि थोक मंडियों से ही माल ऊंची दरों पर मिल रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में बढ़े हुए दामों पर सामान बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई का दबाव झेल रहे ग्राहक जब दुकान पर आते हैं, तो बढ़ी हुई कीमतें सुनकर नाराजगी जताते हैं और कई बार बिना खरीदारी किए ही लौट जाते हैं। चीनी के अलावा रिफाइंड तेल और सरसों तेल के दामों में भी प्रति लीटर दस से पंद्रह रुपये की तेजी आई है। दुकानदारों का कहना है कि यह मूल्यवृद्धि उनके हाथ में नहीं है, बल्कि थोक आपूर्ति और व्यापक बाजार नीतियों पर निर्भर करती है। बारिश की कमी से सब्जी मंडियों पर पड़ा सीधा असर किराना सामान के साथ-साथ जिले की सब्जी मंडियों में भी मौसमी मार साफ दिखाई दे रही है। सब्जी विक्रेता रवींद्र कुमार ने बताया कि इस बार जिले में सामान्य बारिश नहीं होने और सूखे की स्थिति बने रहने से खेतों में सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बाहर से आने वाली आवक कम होने के कारण हरी सब्जियों के भाव चढ़ गए हैं। पहले चालीस रुपये प्रति किलो बिकने वाला परवल अब साठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह बैंगन के दामों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं प्याज और लहसुन की कीमतों में भी इज़ाफ़ा हुआ है। प्याज प्रति किलो 55-60 और लहसून 100-150 रुपये प्रति किलों मिल रहा है। आम उपभोक्ताओं में गहरा रोष, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग बाजार में खरीदारी करने पहुंचे स्थानीय उपभोक्ता कमलेश पांडे ने बेलगाम होती महंगाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। ग्राहकों का कहना है कि एक तरफ दाल और अनाज की कीमतें पहले से ही अधिक थीं, वहीं अब चीनी, तेल और हरी सब्जियों के महंगे होने से महीने का पूरा खर्च असंतुलित हो गया है। लोगों का मानना है कि बुनियादी वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतें आम आदमी की जेब पर सीधा डाका डाल रही हैं। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन तथा सरकार से मांग की है कि आवश्यक खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी और मनमानी मूल्यवृद्धि पर तुरंत अंकुश लगाने के लिए बाजारों में नियमित निगरानी और सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को बढ़ती महंगाई से फौरी राहत मिल सके।  

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