महानंदपुर में लगेगा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट:कचरे से बनेगी हरित ऊर्जा और जैविक खाद, बीपीसीएल को 10 एकड़ जमीन देने की तैयारी

महानंदपुर में लगेगा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट:कचरे से बनेगी हरित ऊर्जा और जैविक खाद, बीपीसीएल को 10 एकड़ जमीन देने की तैयारी

बिहारशरीफ से निकलने वाले कचरे को अब बोझ नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आय का जरिया बनाया जाएगा। सदर प्रखंड के महानंदपुर में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए नगर निगम प्रशासन 10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए एक रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की सांकेतिक लीज दर पर उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है। प्रस्तावित सीबीजी प्लांट में रोजाना 125 से 150 टन पृथक गीले कचरे का उपयोग किया जाएगा। बीपीसीएल के प्रस्ताव के अनुसार कचरे में न्यूनतम 90 प्रतिशत जैविक सामग्री होना अनिवार्य है। इस कचरे के प्रसंस्करण से उच्च गुणवत्ता वाली कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार होगी, जो वाहनों और उद्योगों के लिए हरित ईंधन का काम करेगी। इसके सह-उत्पाद के रूप में जैविक खाद भी बनेगी, जिससे जिले के किसानों को लाभ होगा और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी। आसपास के इलाकों से भी जुटेगा गीला कचरा परियोजना के तहत बिहारशरीफ नगर निगम के अलावा आसपास की नगरपालिकाओं और ग्रामीण पंचायतों से भी गीले जैविक कचरे का संग्रह कर एक केंद्रीय स्थान तक पहुंचाया जाएगा। जमीन के साथ प्लांट तक सुगम आवागमन के लिए सड़क संपर्क की सुविधा भी विकसित की जाएगी। बुनियादी सुविधाओं और मंजूरियों की दरकार बीपीसीएल ने परियोजना की व्यवहार्यता के लिए 1.5 एमवीए कनेक्टेड लोड का विद्युत कनेक्शन, प्रतिदिन 30 से 50 किलोलीटर पानी की आपूर्ति और सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की अपेक्षा जताई है। साथ ही संशोधित ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ के तहत व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) की सुविधा का प्रावधान भी शामिल है। घरों में कचरा अलग करना होगा सबसे अहम इस परियोजना की सफलता का सबसे बड़ा आधार घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण है। सूखा और गीला कचरा मिश्रित होने पर प्लांट की उत्पादन क्षमता और गैस की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नगर निगम को शहर में डोर-टू-डोर सेग्रिगेशन व्यवस्था को कड़ाई से लागू करना होगा। नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने बताया कि बीपीसीएल ने व्यवहार्यता अध्ययन की अनुमति मांगी है। यह प्लांट कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक दिशा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और हरित ऊर्जा उत्पादन का एक बड़ा मॉडल साबित होगा। बिहारशरीफ से निकलने वाले कचरे को अब बोझ नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आय का जरिया बनाया जाएगा। सदर प्रखंड के महानंदपुर में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए नगर निगम प्रशासन 10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए एक रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की सांकेतिक लीज दर पर उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटा है। प्रस्तावित सीबीजी प्लांट में रोजाना 125 से 150 टन पृथक गीले कचरे का उपयोग किया जाएगा। बीपीसीएल के प्रस्ताव के अनुसार कचरे में न्यूनतम 90 प्रतिशत जैविक सामग्री होना अनिवार्य है। इस कचरे के प्रसंस्करण से उच्च गुणवत्ता वाली कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार होगी, जो वाहनों और उद्योगों के लिए हरित ईंधन का काम करेगी। इसके सह-उत्पाद के रूप में जैविक खाद भी बनेगी, जिससे जिले के किसानों को लाभ होगा और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी। आसपास के इलाकों से भी जुटेगा गीला कचरा परियोजना के तहत बिहारशरीफ नगर निगम के अलावा आसपास की नगरपालिकाओं और ग्रामीण पंचायतों से भी गीले जैविक कचरे का संग्रह कर एक केंद्रीय स्थान तक पहुंचाया जाएगा। जमीन के साथ प्लांट तक सुगम आवागमन के लिए सड़क संपर्क की सुविधा भी विकसित की जाएगी। बुनियादी सुविधाओं और मंजूरियों की दरकार बीपीसीएल ने परियोजना की व्यवहार्यता के लिए 1.5 एमवीए कनेक्टेड लोड का विद्युत कनेक्शन, प्रतिदिन 30 से 50 किलोलीटर पानी की आपूर्ति और सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों की अपेक्षा जताई है। साथ ही संशोधित ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ के तहत व्यवहार्यता अंतर निधि (वीजीएफ) की सुविधा का प्रावधान भी शामिल है। घरों में कचरा अलग करना होगा सबसे अहम इस परियोजना की सफलता का सबसे बड़ा आधार घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण है। सूखा और गीला कचरा मिश्रित होने पर प्लांट की उत्पादन क्षमता और गैस की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नगर निगम को शहर में डोर-टू-डोर सेग्रिगेशन व्यवस्था को कड़ाई से लागू करना होगा। नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने बताया कि बीपीसीएल ने व्यवहार्यता अध्ययन की अनुमति मांगी है। यह प्लांट कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक दिशा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और हरित ऊर्जा उत्पादन का एक बड़ा मॉडल साबित होगा।  

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