जहानाबाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। शुक्रवार को इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात एक चिकित्सक अपने चेंबर से लगभग एक घंटे तक अनुपस्थित रहे। इस दौरान दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक गंभीर मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई, जिससे उसकी दिक्कतें बढ़ गईं। चिकित्सक की लंबे समय तक अनुपस्थिति से परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों ने कहा कि 24 घंटे संचालित होने वाली इमरजेंसी सेवा से डॉक्टर का गायब रहना एक गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस दौरान किसी मरीज की हालत बिगड़ जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उल्लेखनीय है कि सदर अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लचर स्वास्थ्य सेवाओं की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने कई बार अस्पताल का औचक निरीक्षण किया है। इन निरीक्षणों में भी कई चिकित्सक ड्यूटी से नदारद मिले थे, जिस पर डीएम ने अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, इमरजेंसी जैसी संवेदनशील सेवा में डॉक्टर का लगभग एक घंटे तक अनुपस्थित रहना दर्शाता है कि प्रशासनिक निर्देशों का अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी ने बताया, “हमें डॉक्टर के अनुपस्थित रहने की सूचना मिली है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” जहानाबाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। शुक्रवार को इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात एक चिकित्सक अपने चेंबर से लगभग एक घंटे तक अनुपस्थित रहे। इस दौरान दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक गंभीर मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई, जिससे उसकी दिक्कतें बढ़ गईं। चिकित्सक की लंबे समय तक अनुपस्थिति से परिजनों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों ने कहा कि 24 घंटे संचालित होने वाली इमरजेंसी सेवा से डॉक्टर का गायब रहना एक गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इस दौरान किसी मरीज की हालत बिगड़ जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उल्लेखनीय है कि सदर अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लचर स्वास्थ्य सेवाओं की शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने कई बार अस्पताल का औचक निरीक्षण किया है। इन निरीक्षणों में भी कई चिकित्सक ड्यूटी से नदारद मिले थे, जिस पर डीएम ने अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, इमरजेंसी जैसी संवेदनशील सेवा में डॉक्टर का लगभग एक घंटे तक अनुपस्थित रहना दर्शाता है कि प्रशासनिक निर्देशों का अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी ने बताया, “हमें डॉक्टर के अनुपस्थित रहने की सूचना मिली है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

