धमतरी में कृषि विभाग ने कीटनाशकों के निर्माण और बिक्री में नियमों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई की है। सोरिदभाट स्थित भारतीय रासायनिक उद्योग की कीटनाशक बनाने वाली इकाई को सील कर दिया गया है। जांच के दौरान कई गड़बड़ियां मिलने के बाद कीटनाशकों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है। कृषि विभाग खरीफ सीजन को देखते हुए जिले में कीटनाशकों के निर्माण, भंडारण और बिक्री की जांच कर रहा है। इसी के तहत राज्य और जिला स्तर की संयुक्त टीम ने भारतीय रासायनिक उद्योग का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को वहां एक्सपायर हो चुके कीटनाशक मिले। इसके अलावा भारत सरकार की ओर से प्रतिबंधित उत्पाद से जुड़ी पैकेजिंग सामग्री भी मिली। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली थोक सामग्री से जुड़ा कंपनी का अनुबंध भी संचालक टीम को नहीं दिखा सका। मासिक जानकारी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने तय समय पर मासिक जानकारी जमा नहीं की थी। साथ ही लैब के संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी मौके पर नहीं मिले। विभाग ने इन सभी कमियों को कीटनाशी अधिनियम और नियमों का उल्लंघन माना है। कीटनाशकों की बिक्री पर रोक और फैक्ट्री सील इसके बाद कृषि विभाग ने संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया और तत्काल प्रभाव से कीटनाशकों की बिक्री पर रोक लगा दी। साथ ही पूरी निर्माण इकाई को सील कर दिया गया। वहां तैयार किए गए कीटनाशकों के नमूने गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अब आगे की कार्रवाई नोटिस के जवाब और लैब की रिपोर्ट के आधार पर होगी। अगर जांच में कीटनाशकों की गुणवत्ता में गड़बड़ी मिली तो नियमानुसार और कार्रवाई की जाएगी। नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई: कृषि विभाग कृषि विभाग के अधिकारी मोनेश साहू ने कहा कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता और मानक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में कीटनाशक दुकानों और कृषि सामग्री से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच आगे भी जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर बिक्री रोकने, लाइसेंस निलंबित करने और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
कृषि विभाग ने कीटनाशक बेचने वाले दुकानदारों और कंपनियों को सिर्फ पंजीकृत और मानक उत्पादों का ही भंडारण और बिक्री करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने किसानों से भी कहा है कि कीटनाशक खरीदते समय लेबल, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट और पंजीयन की जानकारी जरूर जांच लें। किसी दवा या दुकान को लेकर शक हो तो इसकी जानकारी कृषि विभाग को दें। कृषि विभाग का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा और कृषि दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

