सहरसा नगर निगम में फाइनेंसियल गड़बड़ी की जांच:पूर्व मंत्री की शिकायत पर पटना से पहुंची चार सदस्यीय टीम

सहरसा नगर निगम में फाइनेंसियल गड़बड़ी की जांच:पूर्व मंत्री की शिकायत पर पटना से पहुंची चार सदस्यीय टीम

सहरसा नगर निगम में सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और निविदा शर्तों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग की चार सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम शुक्रवार को सहरसा पहुंची। टीम ने नगर आयुक्त कार्यालय में संबंधित योजनाओं और निविदाओं से जुड़ी संचिकाओं की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच टीम के पहुंचते ही नगर निगम परिसर और अधिकारियों-कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। टीम ने तत्काल सभी आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, ताकि निगम के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। नगर आयुक्त कार्यालय के बाद टीम ने हवाई अड्डा के समीप स्थित पार्क और अन्य स्थलों का भी निरीक्षण किया। यह कार्रवाई बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपे गए एक विस्तृत परिवाद पत्र के आधार पर की गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में निगम के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। बंदोबस्ती से संबंधित संचिकाओं की पड़ताल आरोपों के अनुसार, सहरसा नगर निगम में नियमों का उल्लंघन कर योजनाओं को 15 लाख रुपये से कम लागत में खंड-खंड में विभाजित किया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इसके अतिरिक्त, शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर अवैध रूप से टोल व पार्किंग वसूली कराने और निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करने के भी आरोप हैं। जांच टीम विशेष रूप से वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न सैरातों की बंदोबस्ती से संबंधित संचिकाओं की पड़ताल कर रही है। इसमें पटेल मैदान स्थित निर्माणाधीन पार्क, वार्ड संख्या-13 स्थित आई.डी. सिंह चौक के समीप जीर्णोद्धार कार्य और शाहपुर गांव स्थित पार्क निर्माण व पोखर जीर्णोद्धार योजनाएं शामिल हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा जांच दल इसके साथ ही, वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के प्रभार ग्रहण करने की तिथि से अब तक जारी किए गए सभी कार्यादेशों से संबंधित योजनाओं की सूची और मूल संचिकाओं की भी गहन जांच की जा रही है। विभाग द्वारा गठित इस चार सदस्यीय जांच दल में संयुक्त सचिव संजय कुमार (अध्यक्ष), अवर सचिव परमानंद पाण्डेय (सदस्य), अधीक्षण अभियंता हरेन्द्र उपाध्याय (सदस्य) और सहायक अभियंता अखिलेश कुमार (सदस्य) शामिल हैं। जांच दल सभी अभिलेखों और जमीनी हकीकत की जांच कर 15 दिनों के भीतर स्पष्ट मंतव्य के साथ अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मियों व संवेदकों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। सहरसा नगर निगम में सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और निविदा शर्तों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग की चार सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम शुक्रवार को सहरसा पहुंची। टीम ने नगर आयुक्त कार्यालय में संबंधित योजनाओं और निविदाओं से जुड़ी संचिकाओं की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच टीम के पहुंचते ही नगर निगम परिसर और अधिकारियों-कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। टीम ने तत्काल सभी आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, ताकि निगम के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। नगर आयुक्त कार्यालय के बाद टीम ने हवाई अड्डा के समीप स्थित पार्क और अन्य स्थलों का भी निरीक्षण किया। यह कार्रवाई बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपे गए एक विस्तृत परिवाद पत्र के आधार पर की गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में निगम के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। बंदोबस्ती से संबंधित संचिकाओं की पड़ताल आरोपों के अनुसार, सहरसा नगर निगम में नियमों का उल्लंघन कर योजनाओं को 15 लाख रुपये से कम लागत में खंड-खंड में विभाजित किया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इसके अतिरिक्त, शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर अवैध रूप से टोल व पार्किंग वसूली कराने और निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करने के भी आरोप हैं। जांच टीम विशेष रूप से वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न सैरातों की बंदोबस्ती से संबंधित संचिकाओं की पड़ताल कर रही है। इसमें पटेल मैदान स्थित निर्माणाधीन पार्क, वार्ड संख्या-13 स्थित आई.डी. सिंह चौक के समीप जीर्णोद्धार कार्य और शाहपुर गांव स्थित पार्क निर्माण व पोखर जीर्णोद्धार योजनाएं शामिल हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा जांच दल इसके साथ ही, वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के प्रभार ग्रहण करने की तिथि से अब तक जारी किए गए सभी कार्यादेशों से संबंधित योजनाओं की सूची और मूल संचिकाओं की भी गहन जांच की जा रही है। विभाग द्वारा गठित इस चार सदस्यीय जांच दल में संयुक्त सचिव संजय कुमार (अध्यक्ष), अवर सचिव परमानंद पाण्डेय (सदस्य), अधीक्षण अभियंता हरेन्द्र उपाध्याय (सदस्य) और सहायक अभियंता अखिलेश कुमार (सदस्य) शामिल हैं। जांच दल सभी अभिलेखों और जमीनी हकीकत की जांच कर 15 दिनों के भीतर स्पष्ट मंतव्य के साथ अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपेगा। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मियों व संवेदकों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।  

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