औरंगाबाद के नवीनगर थाना क्षेत्र के चंद्रगढ़ गांव में शुक्रवार को बिजली करंट की चपेट में आने से 42 साल के हाइजीन सुपरवाइजर जयप्रकाश सिंह की मौत हो गई। घटना उस समय हुई, जब वह बधार में धान की फसल की पटवन के लिए मोटर स्टार्ट करने गए थे। मृतक चंद्रगढ़ गांव के ही निवासी थे और झारखंड के पलामू जिले के पिपरा प्रखंड में स्वच्छता पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि शुक्रवार को जयप्रकाश सिंह धान की फसल की पटवन के लिए खेत में लगे मोटर को चालू करने पहुंचे थे। इसी दौरान किसी तरह वह बिजली करंट की चपेट में आ गए। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास बधार में काम कर रहे लोगों ने उन्हें करंट की चपेट में झुलसते देखा तो शोर मचाकर ग्रामीणों और परिजनों को घटना की जानकारी दी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित किया घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने किसी तरह बिजली कनेक्शन हटाकर जयप्रकाश सिंह को करंट से अलग किया। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए नवीनगर रेफरल अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई। परिजन शव से लिपटकर रोने लगे। घटना की सूचना नवीनगर थाना पुलिस को दी गई। पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल भेज दिया गया। नवीनगर थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि बिजली करंट की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। दो छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही जयप्रकाश सिंह का शव चंद्रगढ़ गांव पहुंचा, पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। शव देखते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के सदस्यों की चीख-पुकार से गांव का माहौल शोक में डूब गया। जयप्रकाश सिंह तीन भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उनके परिवार में दो छोटे बच्चे भी हैं। पिता की अचानक मौत से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों के मुताबिक जयप्रकाश परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ नौकरी भी कर रहे थे। उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक और भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है।घटना के बाद ग्रामीणों ने खेतों में बिजली से चलने वाले मोटर और खुले तारों के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। औरंगाबाद के नवीनगर थाना क्षेत्र के चंद्रगढ़ गांव में शुक्रवार को बिजली करंट की चपेट में आने से 42 साल के हाइजीन सुपरवाइजर जयप्रकाश सिंह की मौत हो गई। घटना उस समय हुई, जब वह बधार में धान की फसल की पटवन के लिए मोटर स्टार्ट करने गए थे। मृतक चंद्रगढ़ गांव के ही निवासी थे और झारखंड के पलामू जिले के पिपरा प्रखंड में स्वच्छता पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि शुक्रवार को जयप्रकाश सिंह धान की फसल की पटवन के लिए खेत में लगे मोटर को चालू करने पहुंचे थे। इसी दौरान किसी तरह वह बिजली करंट की चपेट में आ गए। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास बधार में काम कर रहे लोगों ने उन्हें करंट की चपेट में झुलसते देखा तो शोर मचाकर ग्रामीणों और परिजनों को घटना की जानकारी दी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित किया घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने किसी तरह बिजली कनेक्शन हटाकर जयप्रकाश सिंह को करंट से अलग किया। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए नवीनगर रेफरल अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई। परिजन शव से लिपटकर रोने लगे। घटना की सूचना नवीनगर थाना पुलिस को दी गई। पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल भेज दिया गया। नवीनगर थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि बिजली करंट की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। दो छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही जयप्रकाश सिंह का शव चंद्रगढ़ गांव पहुंचा, पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। शव देखते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के सदस्यों की चीख-पुकार से गांव का माहौल शोक में डूब गया। जयप्रकाश सिंह तीन भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उनके परिवार में दो छोटे बच्चे भी हैं। पिता की अचानक मौत से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों के मुताबिक जयप्रकाश परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ नौकरी भी कर रहे थे। उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक और भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है।घटना के बाद ग्रामीणों ने खेतों में बिजली से चलने वाले मोटर और खुले तारों के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

