Acanthosis Nigricans: गर्दन और बगल की त्वचा अचानक पड़ने लगी काली? हेल्थलाइन ने बताया सिर्फ गंदगी नहीं, एकेन्थोसिस निगरिकन्स का हो सकता है संकेत

Acanthosis Nigricans: गर्दन और बगल की त्वचा अचानक पड़ने लगी काली? हेल्थलाइन ने बताया सिर्फ गंदगी नहीं, एकेन्थोसिस निगरिकन्स का हो सकता है संकेत

Acanthosis Nigricans Symptoms: कई बार हम देखते हैं कि गर्दन, बगल, जांघों के जोड़ों या कोहनी की त्वचा अचानक गहरी काली, मोटी और मखमली (Velvety) दिखने लगती है। ज्यादातर लोग इसे धूप का असर, टैनिंग या फिर सिर्फ जमने वाली गंदगी समझकर अनदेखा कर देते हैं। लोग इसे साफ करने के लिए साबुन से रगड़ना, स्क्रब करना या तरह-तरह की फेयरनेस क्रीम लगाना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि त्वचा का यह कालापन सिर्फ मैल नहीं है? हेल्थलाइन के मुताबिक, त्वचा के इस तरह अचानक काले और मोटे होने को मेडिकल साइंस में एकेन्थोसिस निगरिकन्स (Acanthosis Nigricans) कहते हैं। यह कोई साधारण स्किन प्रॉब्लम या छूत की बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर के अंदर पल रही किसी बड़ी बीमारी या गड़बड़ी का शुरुआती इशारा हो सकता है। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और शरीर हमें क्या संकेत देने की कोशिश कर रहा है।

क्या होता है एकेन्थोसिस निगरिकन्स (Acanthosis Nigricans)?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह त्वचा से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के मुड़ने वाले हिस्सों (Skin Folds) की त्वचा धीरे-धीरे या अचानक काली पड़ने लगती है। यह कालापन सामान्य त्वचा जैसा नहीं होता। जिस जगह पर यह होता है, वहां की चमड़ी थोड़ी मोटी हो जाती है, उसमें सिलवटें आ जाती हैं और छूने पर वह मखमल जैसी मुलायम महसूस होती है। यह समस्या सबसे ज्यादा गर्दन के पीछे, बगल (Underarms), जांघों के बीच की जगह (Groin), कोहनी और घुटनों पर देखने को मिलती है। कई बार लोगों को लगता है कि नहाते समय गर्दन सही से साफ न होने की वजह से ऐसा हुआ है, लेकिन सच यह है कि रगड़ने या घिसने से यह कालापन कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ सकता है।

सिर्फ मैल नहीं, इन 5 अंदरूनी बीमारियों का संकेत हो सकता है यह कालापन

हेल्थलाइन, मेयो क्लिनिक और डर्मनेट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर आपकी या आपके परिवार में किसी की त्वचा इस तरह काली पड़ रही है, तो इसके पीछे शरीर के अंदर चल रही ये वजहें हो सकती हैं;

1.इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज (Insuiln Resistance)- यह इसका सबसे बड़ा और आम कारण है। जब हम बहुत ज्यादा मीठा या प्रोसेस्ड खाना खाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है। जब खून में इंसुलिन की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो यह त्वचा की कोशिकाओं (Skin Cells) को बहुत तेजी से बढ़ाने लगता है। इसके कारण त्वचा मोटी और काली हो जाती है। यह टाइप-2 डायबिटीज होने से काफी समय पहले का शुरुआती लक्षण है।

2. मोटापा और वजन का बढ़ना (Obesity)- वजन ज्यादा होने से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अलावा, मोटापे की वजह से त्वचा के आपस में बार-बार रगड़ खाने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।

3. हार्मोन का संतुलन बिगड़ना (Hormonal Imbalance)- महिलाओं में पीसीओडी (PCOD/PMOS) या थायराइड (Hypothyroidism) की समस्या होने पर शरीर के हार्मोन्स बिगड़ जाते हैं। इसके चलते गर्दन और बगल की त्वचा पर कालापन आने लगता है।

4. दवाइयों का असर (Medications)- अगर आप बर्थ कंट्रोल पिल्स (गर्भनिरोधक गोलियां), स्टेरॉयड या कोई खास सप्लीमेंट लंबे समय से ले रहे हैं, तो इन दवाइयों के साइड इफेक्ट की वजह से भी त्वचा काली पड़ सकती है।

5. गंभीर बीमारी या कैंसर का इशारा (Rare Cases)- अगर किसी उम्रदराज इंसान की त्वचा अचानक बहुत तेजी से काली और मोटी होने लगे, तो यह पेट, लिवर या अंदरूनी अंगों में पनप रहे किसी ट्यूमर या कैंसर का दुर्लभ संकेत भी हो सकता है।

रगड़ने या क्रीम लगाने से क्यों नहीं ठीक होता यह दर्द?

ज्यादातर लोग इस कालेपन से पीछा छुड़ाने के लिए ब्लीच, होम रेमेडी, लेमन जूस या कठोर स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं। यह जानना बहुत जरूरी है कि यह समस्या त्वचा के ऊपरी हिस्से की नहीं, बल्कि शरीर के अंदरूनी मेटाबॉलिज्म की है। जब तक शरीर के अंदर इंसुलिन, हार्मोन या वजन को कंट्रोल नहीं किया जाएगा, तब तक बाहर से कुछ भी लगाने पर कोई फायदा नहीं होगा। उल्टा, स्किन को जोर से रगड़ने से वहां की चमड़ी में सूजन आ सकती है और वह और ज्यादा काली हो सकती है।

इस समस्या से कैसे पाएं राहत?

हेल्थलाइन और मेयो क्लिनिक के अनुसार, एकेन्थोसिस निगरिकन्स को ठीक करने का सबसे सही तरीका है इसके असली कारण का इलाज करना;

  • ब्लड शुगर और इंसुलिन की जांच कराएं।
  • खान-पान में बदलाव करें।
  • वजन कम करें और वर्कआउट करें।
  • त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) की सलाह।
  • नहाते समय सावधानी रखें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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