प्रयागराज में बारिश के बाद शहर में 5 फीट तक हुए जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा को निर्देश दिया कि अगले 24 घंटे में शहर के निचले इलाकों से जलभराव खत्म कराएं। जहां भी पानी भरा है, वहां पर्याप्त संख्या में वाटर पंप लगाकर तत्काल पानी निकाला जाए। कोर्ट ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा से प्रभावित इलाकों की तत्काल कार्ययोजना तैयार कर अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त करीब 2 घंटे तक सफाई देते रहे। हाईकोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल जलभराव को दूर करें, लेकिन समस्या का समाधान केवल पंप लगाकर पानी निकालने तक सीमित नहीं रहेगा। कोर्ट ने जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था पर भी रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को दोपहर 2 बजे होगी। उस दिन भी नगर आयुक्त को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है। अफसर ने बताया- जलभराव के स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान बन रहा न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने आदेश दिया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को व्यक्तिगत पेशी से हाईकोर्ट ने छूट दे रखी थी। सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ने नगर निगम की ओर से तैयार जलनिकासी की कार्ययोजना को कोर्ट को बताया। सचिव अर्बन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट की ओर से भी हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसकी निगरानी शासन स्तर से की जाएगी। 2014 के जलभराव और हाईकोर्ट के आदेशों का भी उठा मुद्दा सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट टीपी सिंह और अमरेंद्र नाथ सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रयागराज में जलभराव की स्थिति इस बार बेहद गंभीर है। उन्होंने साल 2014 में जलभराव को लेकर दाखिल जनहित याचिका के बारे में भी बताया। कहा कि उस समय हाईकोर्ट ने प्रशासन को समस्या के समाधान के आदेश दिए थे, लेकिन उस स्तर का काम नहीं हुआ। एडवोकेट ने साल 2006 में पानी बचाने के लिए तय किए गए तालाबों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि कई तालाबों को पाट दिया गया, जिससे बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हुई। इस पर कोर्ट ने तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। हाईकोर्ट में एरिया वाइज जलनिकासी की रिपोर्ट देनी होगी हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को जलभराव वाले सभी इलाकों की एरिया वाइज रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इसमें यह बताना होगा कि किस क्षेत्र में पानी निकासी के लिए क्या व्यवस्था की गई है और कहां कितने पंप लगाए गए हैं। जलभराव के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा देखते हुए कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सैनिटाइजेशन और स्वच्छता अभियान चलाने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रयागराज की जलनिकासी समस्या के स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान तैयार कर पेश करने को कहा है। सचिव अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि इस दिशा में काम किया जा रहा है, योजना तैयार की जा रही है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे को इस मामले में एमिकस क्यूरी (वाद मित्र) बनाया गया है। वे जलभराव की समस्या से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर कोर्ट की सहायता करेंगे। 4 दिन की बारिश ने खोली जलनिकासी व्यवस्था की पोल प्रयागराज में रविवार रात करीब 1 बजे से शुरू हुई बारिश बुधवार रात तक जारी रही। चार दिन तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, अलोपीबाग, बैरहना और प्रीतम नगर समेत कई इलाकों में जलभराव हो गया था। घरों में 3 से 5 फीट तक पानी भर गया। करीब 7 हजार परिवार छतों पर रहने को मजबूर हुए। पॉश इलाकों में भी सड़क और घरों में पानी भरने के बाद जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठे। इसी स्थिति का हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की। बुधवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा कोर्ट में पेश हुए थे। गुरुवार को नगर आयुक्त ने फिर कोर्ट में पेश होकर नगर निगम की कार्ययोजना की जानकारी दी। 4 दिन की बारिश में शहर का हाल देखिए DM बोले- जलनिकासी को लेकर अभी काम बाकी, 25 साल पुरानी नालियां चोक हुईं दैनिक भास्कर से बातचीत में डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा- जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन और अल्लापुर जैसे इलाके निचले हैं, यहां हर साल पानी भरता है। इस बार 20-25 साल पुरानी अंडरग्राउंड नालियों में चोक पॉइंट्स मिलने से पानी निकालने में ज्यादा दिक्कत हुई। कई जगह सड़क तोड़कर चोक पॉइंट्स को साफ कराया और अब ज्यादातर पानी निकल चुका है। महाकुंभ के दौरान शहर में सड़क, फ्लाईओवर और दूसरे विकास काम हुए, लेकिन जल निकासी को लेकर अभी काम होना बाकी है। शहर की जमीनी स्थिति भी जल निकासी को मुश्किल बनाती है। पिछले 20-25 साल में हुए निर्माण कामों से पानी का प्राकृतिक बहाव भी प्रभावित हुआ है। DM ने कहा- अब शहर की जमीन की बनावट और जल निकासी की पूरी व्यवस्था को ध्यान में रखकर जल निकासी का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें नए पंपिंग स्टेशन और ड्रेन्स या नालियां बनाने, पुरानी संकरी नालियों को चौड़ा करने और चोक पॉइंट्स को स्थायी रूप से ठीक करने की योजना है। जिससे अगली बारिश में शहर को दोबारा इस तरह के जलभराव का सामना न करना पड़े। ————————- ये खबर भी पढ़िए- प्रयागराज में 2000 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ा: बारिश से बिस्तर डूबे, खाने की दिक्कत हुई तो पलायन शुरू, बोले- चाय तक को तरस गए ”मेरे हॉस्टल में पानी भर गया है। तख्त डूब गए हैं। हॉस्टल से ही 35-40 छात्र पलायन कर घर चले गए हैं। चारों तरफ गंदगी फैली है। जार्जटाउन जैसे पॉश इलाके का ये हाल है।बाकी जगहों के छात्र भी शहर छोड़कर घर जा रहे हैं। खाने-पीने की परेशानी होने लगी है, इसी वजह से हम भी घर जा रहे हैं।” ये बातें प्रयागराज में बारिश के बीच जलभराव से परेशान प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र पवनेश सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहीं। पढ़ें पूरी खबर…

