प्रयागराज के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी के प्रधानाचार्य अशोक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई 29 जुलाई को अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल कराने के आरोप में की गई है। परीक्षा केंद्र पर छापेमारी के दौरान प्रधानाचार्य समेत 11 लोगों को एसटीएफ ने पकड़ा था। शासन के आदेश के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा जुलाई-2026 के सैद्धांतिक विषयों की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) आयोजित की जा रही थी। इसी दौरान सामूहिक नकल की शिकायत मिलने पर एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र पर छापा मारा। इस कार्रवाई में सॉल्वर सदस्यों के साथ राजकीय आईटीआई नैनी के प्रधानाचार्य अशोक कुमार और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। आदेश में बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए सभी 11 लोगों को जेल भेज दिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने अशोक कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। उन्हें उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के प्रावधानों के तहत निलंबित किया गया है। उनका निलंबन 29 जुलाई 2026 से प्रभावी माना गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन महंगाई भत्ता और अन्य प्रतिकर भत्ते मिलेंगे। इसके लिए उन्हें यह प्रमाण-पत्र देना होगा कि वे किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या वृत्ति-व्यवसाय में संलिप्त नहीं हैं। सामूहिक नकल के इस मामले में एसटीएफ की कार्रवाई और नैनी आईटीआई के प्रधानाचार्य पर हुई निलंबन की कार्रवाई ने परीक्षा व्यवस्था की शुचिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

