Indore news: मकान मालिक यदि यह साबित कर देता है कि उसे अपने बेटे की पढ़ाई या परिवार के सदस्य के बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहर में रहना है, तो उस शहर को चुनने के फैसले का अलग से औचित्य साबित करने की जरूरत नहीं है। अपनी जरूरत के लिए कौन-सी जगह उपयुक्त है, यह मकान मालिक और उसका परिवार ही सबसे बेहतर तरीके से तय कर सकते हैं। खजराना क्षेत्र की खिजराबाद कॉलोनी स्थित मकान से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए किराएदार की सेकंड अपील खारिज कर दी।
जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मकान मालिक ने अपने बेटे के कंपनी सेक्रेटरी कोर्स करने की बात दस्तावेजों से साबित की है। ऐसे में यदि मकान मालिक और उसका बेटा यह तय करते हैं कि कोर्स के दौरान इंदौर में रहना उनके लिए सुविधाजनक है, तो यह उनकी पसंद हैं। अपनी वास्तविक जरूरत के सबसे अच्छे निर्णायक भी वे ही है। कोर्ट ने निचली अदालतों द्वारा बेटे की वास्तविक जरूरत को स्वीकार किए जाने को सही माना।
23 साल से किराए पर था मकान
मामला इंदौर के खजराना स्थित प्लॉट नंबर 36-बी, खिजराबाद कॉलोनी के मकान का है। मकान मालिक के अनुसार, उसने 18 जनवरी 2003 को मकान 1100 रुपए मासिक किराए पर दिया था और उसी दिन रेंट एग्रीमेंट भी बनाया गया था। किराएदार नियमित रूप से किराया नहीं दे रहा था। मकान में बिजली के अवैध इस्तेमाल के कारण बिजली चोरी का प्रकरण भी दर्ज हुआ था। बिजली कनेक्शन मकान मालिक के नाम पर होने के कारण उसे भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मकान मालिक ने बेदखली का मुकदमा दायर करते हुए बताया, उसके पति हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं और जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बड़ा बेटा कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स कर रहा है और आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर में रहना चाहता वहीं छोटा बेटा 12वीं के बाद इंदौर बीई में प्रवेश लेना चाहता है। इन परिस्थितियों के चलते मकान की वास्तविक और जरूरी आवश्यकता होने का दावा किया गया। ट्रायल कोर्ट ने मकान मालिक की वास्तविक जरूरत स्वीकार करते हुए 10 अगस्त 2024 मकान खाली करने का आदेश दिया को को था। किराएदार को दो माह में कब्जा सौंपने के साथ 1.04 लाख बकाया किराया देने के निर्देश दिए थे।

