यूनेस्को हाउस में गूंजेगी नालंदा की गाथा:दिल्ली में इतिहास, शिक्षण और विरासत पर संवाद; 25 अगस्त को कार्यक्रम को आयोजन होगा

यूनेस्को हाउस में गूंजेगी नालंदा की गाथा:दिल्ली में इतिहास, शिक्षण और विरासत पर संवाद; 25 अगस्त को कार्यक्रम को आयोजन होगा

नालंदा के इतिहास, शिक्षा और विरासत पर 25 अगस्त को दिल्ली में विशेष चर्चा होगी। यूनेस्को हाउस, चाणक्यपुरी में होने वाले इस कार्यक्रम में शिक्षा, कूटनीति और शोध क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। प्राचीन नालंदा के बौद्धिक योगदान और आज के समय में उसकी विरासत को आगे बढ़ाने पर अपने विचार साझा करेंगे। इस विशेष विमर्श में मुख्य वक्ता के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और अजरबैजान में भारत के राजदूत तथा ‘नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड’ पुस्तक के लेखक एच.ई. अभय के. उपस्थित रहेंगे। दोनों विशेषज्ञ नालंदा महाविहार के उस ऐतिहासिक योगदान की पड़ताल करेंगे, जिसने सदियों तक पूरे एशिया के बौद्धिक परिदृश्य को आकार दिया। सत्र के दौरान इस बात पर गहन चर्चा होगी कि प्राचीन काल में दर्शन, गणित, तर्कशास्त्र और खगोल विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरे नालंदा के विचार आज के सूचना युग में कितने प्रासंगिक हैं। सत्र में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य विशेषज्ञों का मानना है कि नालंदा केवल ईंट-पत्थरों से बना विश्वविद्यालय नहीं था, बल्कि यह मुक्त विचार, गहन विमर्श और समावेशी अध्ययन की एक अनूठी वैश्विक परंपरा थी। इस परिचर्चा के केंद्र में नालंदा की उसी जीवंत परंपरा को फिर से स्थापित करने के आधुनिक प्रयासों को रेखांकित करना होगा। साथ ही यह भी विश्लेषण किया जाएगा कि किस तरह नालंदा की परंपराएं आज के जटिल भू-राजनीतिक परिवेश में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक ज्ञान संवाद को नई दिशा दे सकती हैं। बिहार स्थित नालंदा महाविहार के पुरातात्विक स्थल को वर्ष 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था, जिसके बाद से इसके वैश्विक पुनरुद्धार को लगातार गति मिल रही है। विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के सहयोग से आयोजित हो रहे इस संवाद सत्र में आम जनता और शोधार्थियों के लिए प्रवेश निशुल्क रखा गया है। जिसके लिए डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। सभागार में स्थान ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। नालंदा के इतिहास, शिक्षा और विरासत पर 25 अगस्त को दिल्ली में विशेष चर्चा होगी। यूनेस्को हाउस, चाणक्यपुरी में होने वाले इस कार्यक्रम में शिक्षा, कूटनीति और शोध क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। प्राचीन नालंदा के बौद्धिक योगदान और आज के समय में उसकी विरासत को आगे बढ़ाने पर अपने विचार साझा करेंगे। इस विशेष विमर्श में मुख्य वक्ता के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और अजरबैजान में भारत के राजदूत तथा ‘नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड’ पुस्तक के लेखक एच.ई. अभय के. उपस्थित रहेंगे। दोनों विशेषज्ञ नालंदा महाविहार के उस ऐतिहासिक योगदान की पड़ताल करेंगे, जिसने सदियों तक पूरे एशिया के बौद्धिक परिदृश्य को आकार दिया। सत्र के दौरान इस बात पर गहन चर्चा होगी कि प्राचीन काल में दर्शन, गणित, तर्कशास्त्र और खगोल विज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरे नालंदा के विचार आज के सूचना युग में कितने प्रासंगिक हैं। सत्र में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य विशेषज्ञों का मानना है कि नालंदा केवल ईंट-पत्थरों से बना विश्वविद्यालय नहीं था, बल्कि यह मुक्त विचार, गहन विमर्श और समावेशी अध्ययन की एक अनूठी वैश्विक परंपरा थी। इस परिचर्चा के केंद्र में नालंदा की उसी जीवंत परंपरा को फिर से स्थापित करने के आधुनिक प्रयासों को रेखांकित करना होगा। साथ ही यह भी विश्लेषण किया जाएगा कि किस तरह नालंदा की परंपराएं आज के जटिल भू-राजनीतिक परिवेश में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक ज्ञान संवाद को नई दिशा दे सकती हैं। बिहार स्थित नालंदा महाविहार के पुरातात्विक स्थल को वर्ष 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था, जिसके बाद से इसके वैश्विक पुनरुद्धार को लगातार गति मिल रही है। विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के सहयोग से आयोजित हो रहे इस संवाद सत्र में आम जनता और शोधार्थियों के लिए प्रवेश निशुल्क रखा गया है। जिसके लिए डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। सभागार में स्थान ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।  

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