मऊगंज में UCC विधेयक का विरोध, राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया:अलग-अलग राज्यों के कानूनों में असमानता की आशंका; सभी समुदायों से परामर्श की अपील

मऊगंज में UCC विधेयक का विरोध, राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया:अलग-अलग राज्यों के कानूनों में असमानता की आशंका; सभी समुदायों से परामर्श की अपील

समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 के विरोध में मऊगंज के नागरिकों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर रोक लगाने, मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और सभी समुदायों से बातचीत के बाद ही व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव करने की मांग की गई है। संवैधानिक अनुच्छेदों का दिया हवाला ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 44 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था विविधताओं से भरी है। संविधान निर्माताओं ने धार्मिक व सांस्कृतिक समुदायों को अपने व्यक्तिगत कानूनों के पालन की स्वतंत्रता दी थी। नागरिकों का कहना है कि अनुच्छेद 44 नीति निदेशक तत्व है, जिसे मौलिक अधिकारों की तरह सीधे लागू नहीं कराया जा सकता। कानूनों में असमानता की जताई आशंका ज्ञापनकर्ताओं ने बताया कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषय समवर्ती सूची में आते हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग UCC लागू होने से देशभर में कानूनों में असमानता पैदा होगी। इसके साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ और अन्य धार्मिक व जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की चिंता जताते हुए स्पष्ट अपवाद देने की मांग की गई है। राष्ट्रपति से की गईं चार प्रमुख मांगे

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समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 के विरोध में मऊगंज के नागरिकों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर रोक लगाने, मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और सभी समुदायों से बातचीत के बाद ही व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव करने की मांग की गई है। संवैधानिक अनुच्छेदों का दिया हवाला ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 44 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था विविधताओं से भरी है। संविधान निर्माताओं ने धार्मिक व सांस्कृतिक समुदायों को अपने व्यक्तिगत कानूनों के पालन की स्वतंत्रता दी थी। नागरिकों का कहना है कि अनुच्छेद 44 नीति निदेशक तत्व है, जिसे मौलिक अधिकारों की तरह सीधे लागू नहीं कराया जा सकता। कानूनों में असमानता की जताई आशंका ज्ञापनकर्ताओं ने बताया कि विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषय समवर्ती सूची में आते हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग UCC लागू होने से देशभर में कानूनों में असमानता पैदा होगी। इसके साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ और अन्य धार्मिक व जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की चिंता जताते हुए स्पष्ट अपवाद देने की मांग की गई है। राष्ट्रपति से की गईं चार प्रमुख मांगे

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