कटिहार में सामाजिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहां करीब 200 साल पुराने एक पीर मजार के जीर्णोद्धार में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर योगदान दे रहे हैं। मजार की छत की ढलाई के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ काम कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया। यह मामला कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड के कजरा गांव का है। यहां स्थित लगभग 200 साल पुराने बाबा कालूशाह पीर मजार का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। पुराने मजार को अब भव्य स्वरूप प्रदान करने की तैयारी है, जिसके तहत हाल ही में मजार की छत की ढलाई का काम संपन्न हुआ। इस जीर्णोद्धार कार्य की सबसे खास बात यह रही कि छत की ढलाई में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई लोगों ने श्रमदान किया, जबकि अन्य ने निर्माण कार्य के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बाबा कालूशाह की इस मजार से इलाके के लोगों की आस्था सदियों से जुड़ी हुई है। हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग यहां आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। मजार पर आने वालों की मुरादें होती है पूरी स्थानीय निवासी मुनीम खान, कुंदन झा उर्फ बाबा, अब्दुल सलाम और पंकज यादव ने बताया कि यह मजार उनके पूर्वजों के समय से ही आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आने वालों की मुरादें पूरी होती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे समय में जब धर्म के नाम पर समाज में दूरियां पैदा करने की कोशिशें की जाती हैं, कजरा गांव के लोग मिलकर देश के सामने भाईचारे और एकता की एक मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं। कटिहार के कजरा में बाबा कालूशाह पीर मजार का यह जीर्णोद्धार केवल एक धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सदियों से चली आ रही सच्ची आस्था और गंगा-जमुनी संस्कृति की ऐसी तस्वीर है, जो सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देती है। कटिहार में सामाजिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहां करीब 200 साल पुराने एक पीर मजार के जीर्णोद्धार में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर योगदान दे रहे हैं। मजार की छत की ढलाई के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ काम कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया। यह मामला कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड के कजरा गांव का है। यहां स्थित लगभग 200 साल पुराने बाबा कालूशाह पीर मजार का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। पुराने मजार को अब भव्य स्वरूप प्रदान करने की तैयारी है, जिसके तहत हाल ही में मजार की छत की ढलाई का काम संपन्न हुआ। इस जीर्णोद्धार कार्य की सबसे खास बात यह रही कि छत की ढलाई में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई लोगों ने श्रमदान किया, जबकि अन्य ने निर्माण कार्य के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बाबा कालूशाह की इस मजार से इलाके के लोगों की आस्था सदियों से जुड़ी हुई है। हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग यहां आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। मजार पर आने वालों की मुरादें होती है पूरी स्थानीय निवासी मुनीम खान, कुंदन झा उर्फ बाबा, अब्दुल सलाम और पंकज यादव ने बताया कि यह मजार उनके पूर्वजों के समय से ही आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आने वालों की मुरादें पूरी होती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे समय में जब धर्म के नाम पर समाज में दूरियां पैदा करने की कोशिशें की जाती हैं, कजरा गांव के लोग मिलकर देश के सामने भाईचारे और एकता की एक मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं। कटिहार के कजरा में बाबा कालूशाह पीर मजार का यह जीर्णोद्धार केवल एक धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सदियों से चली आ रही सच्ची आस्था और गंगा-जमुनी संस्कृति की ऐसी तस्वीर है, जो सामाजिक एकता का सशक्त संदेश देती है।

