उत्तर प्रदेश के भदोही में India Carpet Expo का आयोजन, 56 देशों के निर्यातकों को बुलावा

उत्तर प्रदेश के भदोही में India Carpet Expo का आयोजन, 56 देशों के निर्यातकों को बुलावा

कालीन नगरी भदोही में ‘इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026’ की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयोजकों ने इसके लिए 56 देशों के करीब 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है। साथ ही ब्रिक्स देशों के साथ कारोबारी संबंध मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अनुसार, एशिया के सबसे बड़े कालीन मेले एवं प्रदर्शनी के रूप में पेश किए जा रहे इस एक्सपो का आयोजन चार से सात अक्टूबर तक भदोही में होगा। सीईपीसी केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है। सीईपीसी के चेयरमैन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि परिषद के पदाधिकारियों, प्रशासनिक समिति के सदस्यों और मेला आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए लंबी बैठक की।

गोम्बर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने कालीन मेले एवं प्रदर्शनी के लिए 56 देशों के 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है। इनके अलावा, विभिन्न कालीन विनिर्माण कंपनियों के करीब 350 प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।’’
उन्होंने बताया कि इन प्रतिनिधियों के आने से भारत में कालीन निर्माण एवं निर्यातक कंपनियों को उनसे सीधे तौर पर जुड़ने और नए संसाधन तलाश करने में मदद मिलेगी। गोम्बर ने बताया कि इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026 एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा और इसे लेकर विदेशी आयातकों में भी खासा उत्साह है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के करीब 300 कालीन विनिर्माताओं तथा निर्यातकों के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है। वे अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे और ऑर्डर हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिससे भारत के निर्यात को बढ़ाने में योगदान मिलेगा। सीईपीसी के वाइस-चेयरमैन असलम महबूब ने बताया कि इसी साल अक्टूबर में भारत ब्रिक्स देशों की मेजबानी करेगा।

ब्रिक्स देशों के एक प्रतिनिधिमंडल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी आने की सूचना है। महबूब ने कहा कि सीईपीसी के प्रतिनिधि इन प्रतिनिधिमंडलों से मिलने और भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों तथा फर्श पर बिछाए जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के साथ-साथ वाणिज्यिक साझेदारी के अवसर तलाशने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से कालीन आदि उत्पादों के लिए विश्वसनीय वैश्विक स्रोत के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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