विक्रमशिला पुल पर जदयू विधायक और सांसद आमने-सामने:उर्जा मंत्री बोले- विक्रमशिला पुल गिरना प्राकृतिक घटना; सांसद अजय मंडल ने कहा- ये विभागीय लापरवाही का परिणाम

विक्रमशिला पुल पर जदयू विधायक और सांसद आमने-सामने:उर्जा मंत्री बोले- विक्रमशिला पुल गिरना प्राकृतिक घटना; सांसद अजय मंडल ने कहा- ये विभागीय लापरवाही का परिणाम

भागलपुर का विक्रमशिला पुल राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। 29 अगस्त से पुल से बेली ब्रिज हटाकर इसके सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पर काम शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य नवंबर तक पुल को भारी वाहनों के लिए तैयार करना है, लेकिन त्योहारों के मौसम और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच इस फैसले पर सत्ता पक्ष के नेताओं में ही मतभेद सामने आ गया है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने मंगलवार को पुल के क्षतिग्रस्त होने को ‘प्राकृतिक घटना’ बताया है। उन्होंने कहा कि इसे किसी ने गिराया नहीं है और सरकार जनता को परेशानी नहीं होने देगी। मंत्री ने वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था पर विचार करने का आश्वासन दिया और कहा कि पर्व-त्योहार आते-जाते रहेंगे, लेकिन विकास कार्य समय पर करना आवश्यक है। सांसद बोले- पुल का गिरना विभागीय लापरवाही का परिणाम है मंत्री के इस बयान पर भागलपुर के जदयू सांसद अजय कुमार मंडल ने सवाल उठाए हैं। सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति ‘प्राकृतिक आपदा’ का नहीं, बल्कि ‘विभागीय लापरवाही’ का परिणाम है। सांसद अजय कुमार मंडल ने दावा किया कि उन्होंने पुल के क्षतिग्रस्त होने से लगभग आठ महीने पहले ही पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर इसकी खराब स्थिति से अवगत कराया था। उनके अनुसार, उस समय एक तकनीकी रिपोर्ट भी तैयार की गई थी, जिसमें आवश्यक मरम्मत कार्यों का उल्लेख था। सांसद बोले- मरम्मत के लिए राशि उपलब्ध कराई गई थी, धरातल पर काम नहीं हुआ सांसद ने आरोप लगाया कि मरम्मत के लिए विभाग को राशि भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कार्बन प्लेट, स्प्रिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट की जांच व मरम्मत न होने का जिक्र करते हुए कहा कि कागजों पर काम दिखाकर राशि खर्च करने का दावा किया गया, जबकि वास्तविक कार्य लंबित रहा। अजय मंडल ने आरोप लगाया कि वाहनों के लगातार दबाव और झटकों से एक्सपेंशन पर लोड बढ़ता गया और आखिरकार सेतु क्षतिग्रस्त हो गया। उनका कहना है कि समय रहते जरूरी तकनीकी सुधार कर दिए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। प्राकृतिक आपदा नहीं, लापरवाही की आपदा’ सांसद ने मंत्री के प्राकृतिक आपदा वाले तर्क को सीधे खारिज करते हुए कहा कि अगर बादल फटने, भीषण बाढ़ या किसी प्राकृतिक घटना में पुल बह जाता तो उसे प्राकृतिक आपदा कहा जा सकता था। लेकिन तकनीकी खामियों और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण सेतु की स्थिति बिगड़ी है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “यह प्राकृतिक आपदा नहीं, विभागीय लापरवाही की आपदा है।” सांसद का तर्क है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भागलपुर और आसपास के इलाकों में आवागमन करते हैं। दूसरी ओर गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक नाव या अन्य जलमार्ग भी जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे में बेली ब्रिज हटने से पूर्वांचल और सीमांचल के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार नवंबर तक पूरा करना चाहती है काम वहीं, ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से विक्रमशिला सेतु के काम को तेजी से पूरा कर नवंबर तक भारी वाहनों के परिचालन योग्य बनाने का लक्ष्य बताया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि इससे पहले पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद महज 28 दिनों में बेली ब्रिज तैयार कर आवागमन बहाल किया गया था। इस बार भी प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर तैयार है। बता दें कि विक्रमशिला पुल के पुनर्स्थापना को लेकर पंचकुला से स्टील गर्डर पहुंचने लगे हैं। पंचकुला और मेरठ से दो सिक्स एक्सेल ट्रक 19 स्टील गर्डर को लेकर भागलपुर पहुंचे। इन स्टील गर्डर को एसपी सिंगला के महिला आईटीआई के पास बने कास्टिंग यार्ड में रखा जा रहा है। बाकी का स्ट्रक्चर भी अगले सप्ताह तक पहुंचने की बात बताई जा रही है। भागलपुर का विक्रमशिला पुल राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। 29 अगस्त से पुल से बेली ब्रिज हटाकर इसके सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पर काम शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य नवंबर तक पुल को भारी वाहनों के लिए तैयार करना है, लेकिन त्योहारों के मौसम और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच इस फैसले पर सत्ता पक्ष के नेताओं में ही मतभेद सामने आ गया है। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने मंगलवार को पुल के क्षतिग्रस्त होने को ‘प्राकृतिक घटना’ बताया है। उन्होंने कहा कि इसे किसी ने गिराया नहीं है और सरकार जनता को परेशानी नहीं होने देगी। मंत्री ने वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था पर विचार करने का आश्वासन दिया और कहा कि पर्व-त्योहार आते-जाते रहेंगे, लेकिन विकास कार्य समय पर करना आवश्यक है। सांसद बोले- पुल का गिरना विभागीय लापरवाही का परिणाम है मंत्री के इस बयान पर भागलपुर के जदयू सांसद अजय कुमार मंडल ने सवाल उठाए हैं। सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति ‘प्राकृतिक आपदा’ का नहीं, बल्कि ‘विभागीय लापरवाही’ का परिणाम है। सांसद अजय कुमार मंडल ने दावा किया कि उन्होंने पुल के क्षतिग्रस्त होने से लगभग आठ महीने पहले ही पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर इसकी खराब स्थिति से अवगत कराया था। उनके अनुसार, उस समय एक तकनीकी रिपोर्ट भी तैयार की गई थी, जिसमें आवश्यक मरम्मत कार्यों का उल्लेख था। सांसद बोले- मरम्मत के लिए राशि उपलब्ध कराई गई थी, धरातल पर काम नहीं हुआ सांसद ने आरोप लगाया कि मरम्मत के लिए विभाग को राशि भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कार्बन प्लेट, स्प्रिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट की जांच व मरम्मत न होने का जिक्र करते हुए कहा कि कागजों पर काम दिखाकर राशि खर्च करने का दावा किया गया, जबकि वास्तविक कार्य लंबित रहा। अजय मंडल ने आरोप लगाया कि वाहनों के लगातार दबाव और झटकों से एक्सपेंशन पर लोड बढ़ता गया और आखिरकार सेतु क्षतिग्रस्त हो गया। उनका कहना है कि समय रहते जरूरी तकनीकी सुधार कर दिए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। प्राकृतिक आपदा नहीं, लापरवाही की आपदा’ सांसद ने मंत्री के प्राकृतिक आपदा वाले तर्क को सीधे खारिज करते हुए कहा कि अगर बादल फटने, भीषण बाढ़ या किसी प्राकृतिक घटना में पुल बह जाता तो उसे प्राकृतिक आपदा कहा जा सकता था। लेकिन तकनीकी खामियों और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण सेतु की स्थिति बिगड़ी है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “यह प्राकृतिक आपदा नहीं, विभागीय लापरवाही की आपदा है।” सांसद का तर्क है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भागलपुर और आसपास के इलाकों में आवागमन करते हैं। दूसरी ओर गंगा का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक नाव या अन्य जलमार्ग भी जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे में बेली ब्रिज हटने से पूर्वांचल और सीमांचल के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार नवंबर तक पूरा करना चाहती है काम वहीं, ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से विक्रमशिला सेतु के काम को तेजी से पूरा कर नवंबर तक भारी वाहनों के परिचालन योग्य बनाने का लक्ष्य बताया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि इससे पहले पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद महज 28 दिनों में बेली ब्रिज तैयार कर आवागमन बहाल किया गया था। इस बार भी प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर तैयार है। बता दें कि विक्रमशिला पुल के पुनर्स्थापना को लेकर पंचकुला से स्टील गर्डर पहुंचने लगे हैं। पंचकुला और मेरठ से दो सिक्स एक्सेल ट्रक 19 स्टील गर्डर को लेकर भागलपुर पहुंचे। इन स्टील गर्डर को एसपी सिंगला के महिला आईटीआई के पास बने कास्टिंग यार्ड में रखा जा रहा है। बाकी का स्ट्रक्चर भी अगले सप्ताह तक पहुंचने की बात बताई जा रही है।  

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