Marathi Language Rule: महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के फैसले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। राज्य के रिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि राज्य में रिक्शा या टैक्सी चालकों को मराठी भाषा आनी चाहिए। मराठी नहीं जानने वाले चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनका परमिट या लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
हालांकि, सरकार के इस फैसले का कुछ रिक्शा चालकों और उत्तर भारतीय संगठनों ने विरोध किया है। इसी बीच नवी मुंबई की उत्तर भारतीय विकास सेना के अध्यक्ष संजय दुबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने खुले तौर पर कहा है कि वह रिक्शा चलाएंगे, पैसे कमाएंगे, लेकिन मराठी नहीं बोलेंगे।
‘रिक्शा भी चलाऊंगा और मराठी भी नहीं बोलूंगा’
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में संजय दुबे ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मराठी नहीं बोलने वाले उत्तर भारतीय रिक्शा चालकों का लाइसेंस रद्द करने की बात कही जा रही है।
इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह रिक्शा भी चलाएंगे, पैसे भी कमाएंगे और मराठी भी नहीं बोलेंगे। उन्होंने वीडियो में स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं रिक्शा भी चलाऊंगा, पैसे भी कमाऊंगा और मराठी भी नहीं बोलूंगा।”
उनके इस बयान के बाद मराठी भाषा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
प्रताप सरनाईक ने दी कार्रवाई की चेतावनी
संजय दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर मराठी भाषा सीखने से इनकार करते हुए वीडियो वायरल कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ परिवहन विभाग और आरटीओ की ओर से कानून के दायरे में कार्रवाई की जाएगी।
सरनाईक ने कहा कि यदि कोई रिक्शा या टैक्सी चालक यह रुख अपनाता है कि वह किसी भी कीमत पर मराठी भाषा नहीं सीखेगा, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में नियमावली तैयार करने के लिए बैठक में फैसला लिया जाएगा।
ऐप बेस्ड कैब चालकों पर भी लागू होगा नियम
सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार मराठी भाषा से जुड़ी यह शर्त केवल सामान्य रिक्शा और टैक्सी चालकों तक सीमित नहीं रहेगी। जबकि ओला-उबर जैसे ऐप आधारित कैब चलाने वाले चालकों पर भी यह नियम लागू होगा।
यानी मुंबई और महाराष्ट्र में ऐप बेस्ड कैब सेवा देने वाले चालकों को भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। मराठी भाषा का सम्मान नहीं करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ संबंधित प्राधिकरण को तत्काल कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
मराठी भाषा की अनिवार्यता पर बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। सरकार जहां इस नियम को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है, वहीं कुछ उत्तर भारतीय संगठनों और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने रिक्शा और टैक्सी चालकों पर मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठी लोगों के वोट हासिल करने के लिए इस तरह की छोटी राजनीति की जा रही है।
अबू आजमी ने कहा कि बड़ी-बड़ी कंपनियों में हजारों लोग काम करते हैं, पहले उनसे मराठी बोलने के लिए कहा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्सी और रिक्शा चालकों को यह कहकर डराया जा रहा है कि तय समय तक मराठी नहीं सीखने पर उनका परमिट रद्द कर दिया जाएगा।

