Mahua Moitra विवाद में सांसद अरविंद सावंत ने Om Birla को पत्र लिखा

Mahua Moitra विवाद में सांसद अरविंद सावंत ने Om Birla को पत्र लिखा

शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन अधिकारियों के आचरण की जांच की मांग की, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर जिले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से 14 अगस्त की रात को एक सर्किट हाउस को कथित तौर पर खाली करने के लिए कहा था। पत्र में सावंत ने कहा कि महुआ से जुड़ी इस घटना ने एक सांसद के विशेषाधिकार, गरिमा और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा, “मौजूदा सांसद के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई बेहद आपत्तिजनक है और इससे विशेषाधिकार, गरिमा और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

मैं आपसे इस सम्मानित सदन के सदस्यों की गरिमा, अधिकारों और विशेषाधिकारों के संरक्षक के तौर पर मामले में तुरंत दखल देने और संबंधित अधिकारियों को महुआ मोइत्रा की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने का आग्रह करता हूं।”
सावंत ने उन अधिकारियों के आचरण की जांच की भी मांग की, जिन्होंने महुआ से कथित तौर पर सर्किट हाउस से खाली करने के लिए कहा था। उन्होंने अधिकारियों के आचरण को “प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन” करार देते हुए इसके लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की। महुआ ने इस घटना को लेकर बिरला को नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अपर जिलाधिकारी नृपेंद्र सिंह और नाजरेथ की उपजिलाधिकारी अनामिका बेरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।

तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया है कि उन्हें सर्किट हाउस में कमरा आवंटित किए जाने और रात का खाना परोसे जाने के बावजूद देर रात यह कहते हुए कमरा खाली करने के लिए कहा गया कि परिसर वार्षिक रखरखाव और सफाई के लिए बंद है। सावंत ने सर्किट हाउस के बाहर उस समय भीड़ जुटने का भी जिक्र किया, जब महुआ से वहां से जाने के लिए कहा गया था। उन्होंने लिखा, “और भी गंभीर बात यह है कि जब महुआ से देर रात सर्किट हाउस से जाने के लिए कहा जा रहा था, तब परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसने भड़काऊ नारे लगाए और माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

इससे उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद के राधाकृष्णन ने भी इस घटना को लेकर बिरला को पत्र लिखा है और मामले की औपचारिक जांच कराने या इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है।

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