Red Fort Blast Case के आरोपी Jasir Bilal Wani की याचिका खारिज, Delhi High Court ने डिफ़ॉल्ट ज़मानत से किया इनकार

Red Fort Blast Case के आरोपी Jasir Bilal Wani की याचिका खारिज, Delhi High Court ने डिफ़ॉल्ट ज़मानत से किया इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली फोर्ट ब्लास्ट केस के आरोपी जासिर बिलाल वानी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार कर दिया। उसने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच का समय बढ़ाए जाने के आधार पर डिफ़ॉल्ट ज़मानत मांगी थी।
कोर्ट ने NIA की जांच की अवधि बढ़ा दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उसकी डिफ़ॉल्ट ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर दी थी। NIA ने 14 मई को चार्जशीट दाखिल की थी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने जासिर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश की अर्ज़ी खारिज कर दी। उसने स्पेशल NIA कोर्ट द्वारा जांच की अवधि को 90 दिन से ज़्यादा बढ़ाने के फ़ैसले को चुनौती दी थी। उसने NIA कोर्ट द्वारा उसकी डिफ़ॉल्ट ज़मानत खारिज करने के आदेश को भी चुनौती दी थी।

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NIA की तरफ से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) माधव खुराना पेश हुए और उन्होंने नोटिस स्वीकार किया। जासिर बिलाल वानी के वकील ने कहा कि जांच की अवधि को 90 दिन से आगे बढ़ाने का आदेश गैर-कानूनी है। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, डिफ़ॉल्ट ज़मानत से इनकार करने का आदेश भी गैर-कानूनी है। वकील ने तर्क दिया कि NIA ने जांच की अवधि बढ़ाने के लिए 13 फरवरी को आवेदन दिया था। 90 दिन की अवधि 15 फरवरी को खत्म हो रही थी।

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90 दिन पूरे होने पर UAPA की धारा 43 (D) लागू होती है। अगर 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है, तो आरोपी डिफ़ॉल्ट ज़मानत का हकदार होता है।
दूसरी ओर, NIA ने कहा कि NIA कोर्ट द्वारा पारित दोनों आदेशों में कोई कानूनी खामी नहीं है। जासिर बिलाल वानी पर 11 नवंबर, 2025 के दिल्ली लाल किला विस्फोट मामले में अन्य आरोपियों के साथ चार्जशीट दाखिल की गई है।

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