शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने मंगलवार को संकेत दिया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र सरकार में काम करने के लिए दिल्ली बुलाया जा सकता है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए राउत ने कहा कि दिल्ली को देवेंद्र फडणवीस की ज़रूरत है, और सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल के तहत उनसे सलाह-मशविरा कर रहे होंगे। राउत ने ऐसी राजनीतिक चालों को ट्रायल बैलून बताया और कहा कि भले ही फडणवीस महाराष्ट्र छोड़ने के इच्छुक न हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका ज़रूरी हो सकती है।
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राउत ने कहा कि राजनीति में ऐसी बातें (पतंग उड़ाना) स्वाभाविक हैं। दिल्ली को देवेंद्र फडणवीस की ज़रूरत है। भले ही फडणवीस दिल्ली जाने के इच्छुक न हों, लेकिन देश उन्हें बुला रहा है। प्रधानमंत्री को एक बेहतरीन कैबिनेट बनानी है, इसीलिए वह देवेंद्र फडणवीस से बात कर रहे हैं। अगर घर बदलना हो, तो अपना सामान तो समेटना ही पड़ता है। फडणवीस भले ही यहां बने रहने की ज़बरदस्त इच्छा रखते हों, लेकिन उनके आस-पास के लोग ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो उन्होंने देवताओं का विसर्जन कर दिया हो।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के नेताओं और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकें अक्सर आने वाले राजनीतिक बदलावों का संकेत देती हैं। फडणवीस की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत और दूसरे नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकातों का ज़िक्र करते हुए राउत ने कहा कि जैसे देवेंद्र फडणवीस प्रधानमंत्री से मिलते हैं, वैसे ही दूसरे नेता अमित शाह से मिलते हैं। ‘वह यहीं रहेंगे’ कहने का असल मतलब यह है कि वह यहां नहीं रहेंगे। वे कहते थे ‘हम वापस आएंगे’, लेकिन जब समय आया, तो वे नहीं आए। ऐसा करने के लिए शिवसेना को तोड़ना पड़ा और गवर्नर ने यह काम किया। उन्हें एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा।
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राउत ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित बदलावों को लेकर भी केंद्र की आलोचना की और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को किसी नेता को शामिल करने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्रालय में अच्छा काम नहीं कर पाए, इसलिए दबाव डालकर उनसे इस्तीफा लिया गया। अगर उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय दिया जाना है, तो युवाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अगर मकसद युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कना है, तो वे ऐसा करेंगे ही। संगठनात्मक नज़रिए से विनोद तावड़े अहम हैं।
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