एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता डबल-ट्रैप निशानेबाज रोंजन सोढ़ी का मानना है कि 2036 के ओलंपिक में 30-40 पदक जीतने का भारत का लक्ष्य दूर की कौड़ी है क्योंकि उसके लिए प्रतिभा की पहचान करने की 10 वर्षीय योजना में देश पीछे चल रहा है। भारत 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए मजबूती से दावा पेश कर रहा है। भारत अभी तक ओलंपिक में कभी भी अपने पदकों की संख्या दहाई के अंक तक नहीं पहुंच पाया है।उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2021 में तोक्यो में खेले गए ओलंपिक खेलों में रहा था जहां उसने एक स्वर्ण सहित सात पदक जीते थे। सोढ़ी ने मंगलवार को पीटीआई से कहा, ‘‘कोई किसी को सोचने या सपने देखने से नहीं रोक सकता लेकिन अगर पदकों की बात करें तो हम बहुत पीछे हैं। ओलंपिक में 30 से 40 पदक जीतना अभी दूर की कौड़ी लगता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने (ग्लास्गो) राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया।लेकिन विश्व मानकों के लिहाज से हम काफी पीछे हैं। हमें (संस्कृति) का निर्माण करना होगा। सरकार जिस गंभीरता से ओलंपिक की मेजबानी का दावा पेश कर रही है उसे देखते हुए संभावना है कि हमें मेजबानी मिल जाएगी लेकिन इसके बाद हमें खेल संस्कृति विकसित करनी होगी।’’
सोढ़ी ने कहा, ‘‘असल में हम देर कर चुके हैं।2036 अब से 10 साल बाद है। इसलिए, हमें अभी प्रतिभाओं की पहचान करने की जरूरत है। हमें ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है जिनमें सरकार या महासंघ सीनियर निशानेबाजों या ऐसे लोगों को शामिल करें जो स्कूलों में जाकर प्रतिभाओं की खोज और पहचान कर सकें।
एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता डबल-ट्रैप निशानेबाज रोंजन सोढ़ी का मानना है कि 2036 के ओलंपिक में 30-40 पदक जीतने का भारत का लक्ष्य दूर की कौड़ी है क्योंकि उसके लिए प्रतिभा की पहचान करने की 10 वर्षीय योजना में देश पीछे चल रहा है। भारत 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए मजबूती से दावा पेश कर रहा है। भारत अभी तक ओलंपिक में कभी भी अपने पदकों की संख्या दहाई के अंक तक नहीं पहुंच पाया है।
उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2021 में तोक्यो में खेले गए ओलंपिक खेलों में रहा था जहां उसने एक स्वर्ण सहित सात पदक जीते थे। सोढ़ी ने मंगलवार को पीटीआई से कहा, ‘‘कोई किसी को सोचने या सपने देखने से नहीं रोक सकता लेकिन अगर पदकों की बात करें तो हम बहुत पीछे हैं। ओलंपिक में 30 से 40 पदक जीतना अभी दूर की कौड़ी लगता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने (ग्लास्गो) राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया।
लेकिन विश्व मानकों के लिहाज से हम काफी पीछे हैं। हमें (संस्कृति) का निर्माण करना होगा। सरकार जिस गंभीरता से ओलंपिक की मेजबानी का दावा पेश कर रही है उसे देखते हुए संभावना है कि हमें मेजबानी मिल जाएगी लेकिन इसके बाद हमें खेल संस्कृति विकसित करनी होगी।’’
सोढ़ी ने कहा, ‘‘असल में हम देर कर चुके हैं।
2036 अब से 10 साल बाद है। इसलिए, हमें अभी प्रतिभाओं की पहचान करने की जरूरत है। हमें ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है जिनमें सरकार या महासंघ सीनियर निशानेबाजों या ऐसे लोगों को शामिल करें जो स्कूलों में जाकर प्रतिभाओं की खोज और पहचान कर सकें।
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