Hereditary Spastic Paraplegia: पैरों में अचानक या धीरे-धीरे कमजोरी महसूस होना, चलने-फिरने में संतुलन बिगड़ना और मांसपेशियों में कसाव (जकड़न) आना कई तंत्रिका (नर्वस सिस्टम) से जुड़ी बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं। यूनाइटेड किंगडम की स्वास्थ्य एजेंसी NHS के अनुसार, इन्हीं में से एक दुर्लभ अनुवांशिक स्थिति है हेरेडिटरी स्पास्टिक पैरापलेजिया (Hereditary Spastic Paraplegia – HSP)। यह बीमारी मुख्य रूप से हमारे पैरों की मांसपेशियों को प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कि ये क्या होती है? इसके कारण और लक्षण क्या हैं?
क्या है हेरेडिटरी स्पास्टिक पैरापलेजिया (HSP)?
अमेरिकी स्वास्थ्य संस्थान नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (NINDS) के अनुसार, हेरेडिटरी स्पास्टिक पैरापलेजिया बीमारियों का एक ऐसा समूह है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी (अनुवांशिक रूप से) स्थानांतरित हो सकता है। इसमें रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) की उन लंबी नसों को नुकसान पहुंचता है, जो दिमाग से पैरों की मांसपेशियों तक चलने और संतुलन बनाने के संदेश भेजती हैं। नसों के इस नुकसान के कारण पैरों में कमजोरी और कड़ापन आने लगता है।
HSP के प्रमुख लक्षण
- चलने में दिक्कत होना, पैर घसीटकर चलना या बार-बार ठोकर लगना।
- असमतल जमीन पर संतुलन बनाए रखने में दिक्कत आना।
- बार-बार या तुरंत पेशाब आने की समस्या होना।
- पैरों या पंजों में सुन्नपन या कम महसूस होना।
क्यों होती है यह बीमारी?
यह मुख्य रूप से खराब या उत्परिवर्तित (Mutated) जीन के कारण होती है, जो माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफर होते हैं। ये जीन रीढ़ की हड्डी की नसों के सही संचालन के लिए जरूरी प्रोटीन नहीं बना पाते, जिससे नसें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
इसका निदान और इलाज क्या है?
HSP का पता लगाने के लिए डॉक्टर एमआरआई (MRI), तंत्रिका जांच (Nerve conduction tests) और जेनेटिक टेस्टिंग का सहारा लेते हैं। हालांकि, HSP का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर देखभाल और थेरेपी से लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है;
- फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)।
- मांसपेशियों की जकड़न (Spasm) को कम करने के लिए डॉक्टर मांसपेशी रिलेक्सेंट दवाएं दे सकते हैं।
- चलने में मदद के लिए ब्रेसेस, छड़ी या आवश्यकता पड़ने पर व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

