बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु का मैच आयरलैंड की सोफिया नोबल से हो रहा है। उन्होंने पहला गेम 21-7 से जीत लिया है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हरिहरन अम्साकरुणन और एमआर अर्जुन ने मेंस डबल्स में आयरलैंड के स्कॉट गिल्डिया और पॉल रेनॉल्ड्स को हराया। त्रिषा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने विमेंस डबल्स में स्पेन की पाउला लोपेज और एल रोड्रिगेज को मात दी। मेंस डबल्स में आयरिश जोड़ी मैच से हटी भारतीय जोड़ी ने पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में भी भारतीय जोड़ी 6-4 से आगे थी, तभी आयरलैंड की जोड़ी ने चोट की वजह से मैच से हटने का फैसला किया। विमेंस डबल्स में त्रिसा-गायत्री की एकतरफा जीत विमेंस डबल्स में त्रिषा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने स्पेन के पाउला लोपेज और एल रोड्रिगेज को 21-9, 21-13 से हराया। आयुष शेट्टी के सामने डिफेंडिंग चैंपियन भारत के आयुष शेट्टी को पहले ही राउंड में बड़ा मुकाबला खेलना है। उनका सामना चीन के टॉप सीड और डिफेंडिंग चैंपियन शी यू ची से होगा। दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक 3 मुकाबले हुए हैं और तीनों में भारतीय खिलाड़ी को हार मिली है। खिलाड़ी रिटायर क्यों होते हैं, टॉप सीड क्या होता है और वर्ल्ड चैंपियनशिप खास क्यों? 1. मैच के बीच खिलाड़ी रिटायर क्यों होते हैं? बैडमिंटन में रिटायरमेंट का मतलब है कि खिलाड़ी मैच शुरू होने के बाद उसे बीच में छोड़ देता है। इसका सबसे आम कारण चोट या शारीरिक परेशानी होती है। मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द या ऐसी चोट, जिससे आगे खेलना जोखिम भरा हो, इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। रिटायरमेंट होने पर विपक्षी खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जाता है। यह वॉकओवर या विड्रॉल से अलग होता है, क्योंकि रिटायरमेंट में मैच शुरू हो चुका होता है। 2. टॉप सीड और डिफेंडिंग चैंपियन क्या होता है? टॉप सीड वह खिलाड़ी या जोड़ी होती है जिसे टूर्नामेंट में उसकी रैंकिंग के आधार पर सबसे मजबूत दावेदार माना जाता है। सीडिंग का मकसद मजबूत खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में एक-दूसरे के सामने आने से रोकना होता है। वहीं डिफेंडिंग चैंपियन वह खिलाड़ी होता है जिसने पिछली बार टूर्नामेंट जीता हो और इस बार अपने खिताब को बचाने उतरा हो। इसलिए आयुष शेट्टी के सामने शी यू ची का मुकाबला खास है, क्योंकि शी यू ची डिफेंडिंग चैंपियन हैं। 3. वर्ल्ड चैंपियनशिप इतनी खास क्यों? बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीतने वाला खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियन कहलाता है। ओलंपिक चार साल में एक बार होता है और इसमें क्वालिफिकेशन के जरिए सीमित खिलाड़ी पहुंचते हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप आमतौर पर हर साल होती है, हालांकि ओलंपिक साल में इसका आयोजन नहीं होता। वहीं ऑल इंग्लैंड ओपन एक ऐतिहासिक टूर्नामेंट है, लेकिन यह BWF वर्ल्ड टूर का सुपर 1000 इवेंट है। वर्ल्ड चैंपियनशिप सीधे BWF की वर्ल्ड चैंपियनशिप है, इसलिए दोनों का दर्जा अलग है।
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बैडमिंटन से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप आज से:भारत 17 साल बाद मेजबानी कर रहा, सिंधु के पास छठा मेडल जीतने का मौका नई दिल्ली में आज से बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप शुरू हो रही है। भारत 17 साल बाद इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। 23 अगस्त तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के मुकाबले इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होंगे।
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप- पीवी सिंधु ने पहला गेम जीता:भारतीय जोड़ियो की जीत से शुरुआत, हरिहरन-अर्जुन और त्रिषा-गोपीचंद अगले दौर में

