बेमेतरा जिले के सलधा गाँव में रामा धाम प्रतिनिधि कार्यशाला को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समाज को जीवन के लक्ष्य और गो-संरक्षण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में केवल ‘व्यक्ति’ नहीं, बल्कि ‘व्यक्तित्व’ बनना चाहिए। उनके मुताबिक जीवन की वास्तविक पूंजी धन-पैसा नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और चरित्र है। यदि लक्ष्य ऊंचा और आदर्शवादी हो तो भौतिक संसाधन भी स्वतः प्राप्त किए जा सकते हैं। देशी गाय के संकट पर जताई चिंता शंकराचार्य ने गो-वंश पर मंडरा रहे संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि आज गवय और जर्सी जैसी नस्लों के कारण देशी गाय के अस्तित्व पर संकट बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह खोटा सिक्का असली सिक्के को चलन से बाहर करने का प्रयास करता है, उसी तरह विदेशी नस्लें देशी गाय के लिए चुनौती बन रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भारतीयता की प्रतिष्ठा गो-माता के माध्यम से ही संभव है। बोले- हर हिंदू को बनना होगा ‘गौ-व्रती’ उन्होंने कहा कि पूर्ण गो-रक्षा का संकल्प तभी पूरा हो सकता है, जब प्रत्येक हिंदू स्वयं गो-संरक्षण के प्रति संकल्पित हो। शंकराचार्य ने इसी दिशा में कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से गोपाष्टमी तक ‘रामा गोधाम’ के लिए विशेष नोट अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों ने गो-संवर्धन पर रखे विचार कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भी गो-संरक्षण और संवर्धन से जुड़े विषयों पर विचार रखे। जीतू भट्ट ने गो-आधारित उत्पादों के निर्माण और आर्थिक स्वावलंबन, किशोर जी ने गो-संरक्षण के कानूनी पहलुओं, आनंद उपाध्याय ने शास्त्रों में वर्णित गो-महिमा और यशवंत जी ने गो-संरक्षण अभियान में मीडिया की भूमिका पर मार्गदर्शन दिया। गो-सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान समापन सत्र में गो-सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले दायित्ववान प्रभारियों को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के माध्यम से गो-संरक्षण, भारतीय नस्लों के संवर्धन और समाज में गो-सेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

