कोरबा के लगातार बारिश के चलते मिनीमाता हसदेव बांगो जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलाशय में पानी की लगातार बढ़ती आवक को देखते हुए आज रात 3 गेट खोलकर हसदेव नदी में करीब 3005 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलाशय का जलभराव 92.48% तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने एहतियातन बाढ़ का अलर्ट जारी किया है। मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक-3 माचाडोली के कार्यपालन अभियंता एसके भारती ने बताया कि रात 7.45 बजे तक जलाशय में जलभराव 92.48% दर्ज किया गया। पानी की आवक लगातार बनी हुई है, इसलिए जलस्तर नियंत्रित करने के लिए तीन गेट खोले गए हैं। 35 गांवों में मुनादी, लोगों को किया जा रहा सतर्क हसदेव नदी के किनारे संभावित बाढ़ प्रभावित 35 गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। मवेशियों और बच्चों का रखें विशेष ध्यान लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने, मवेशियों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर ले जाने तथा बच्चों को नदी-नालों से दूर रखने की अपील की गई है। राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें हाई अलर्ट पर हैं। दर्री बैराज से भी छोड़ा जा सकता है पानी जल संसाधन विभाग ने चेतावनी दी है कि बांगो जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद दर्री बैराज से भी पानी छोड़े जाने की संभावना है। विभाग ने नदी किनारे मौजूद लोगों और खदान ठेकेदारों व औद्योगिक इकाइयों को अपनी चल-अचल संपत्तियां तत्काल सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की सलाह दी है।
कोरबा। लगातार बारिश के कारण मिनीमाता बांगो जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। जलस्तर नियंत्रित करने के लिए आज जलाशय के 3 गेट खोलकर हसदेव नदी में लगभग 3005 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया है। मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक 03 माचाडोली के कार्यपालन अभियंता एस.के. भारती ने बताया कि आज रात 7.45 बजे तक जलाशय में जल भराव 92.48 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। जलाशय में पानी की आवक लगातार बनी हुई है, जिसके कारण एहतियातन यह कदम उठाया गया है। कार्यपालन अभियंता ने सर्वसाधारण, खनिज खदान ठेकेदारों, औद्योगिक इकाइयों और संस्थानों को सूचित किया है कि वे हसदेव नदी के किनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्थापित अपनी चल-अचल संपत्तियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आकस्मिक बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। बाढ़ की संभावना को देखते हुए नदी किनारे बसे 35 गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित प्रभावित गांवों में बांगो, चर्रा, पोड़ी-उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला शामिल हैं। राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से नदी किनारे न जाने, मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है। जल संसाधन विभाग ने यह भी बताया कि बांगो जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद दर्री बैराज से भी पानी छोड़े जाने की संभावना है।


