जमालपुर रेलवे मुख्य अस्पताल के फीमेल सर्जिकल वार्ड में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भर्ती महिला मरीज जया कुमारी को कथित तौर पर एक्सपायरी डेट का सलाइन चढ़ाए जाने का मामला सामने आया। सलाइन की एक्सपायरी डेट पर नजर पड़ने के बाद मरीज जया कुमारी ने इसकी शिकायत अस्पताल की सिस्टर से की। शिकायत को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि सिस्टर के व्यवहार से महिला मरीज काफी आहत हुई और मानसिक रूप से परेशान हो गई। यह मामला धीरे-धीरे अस्पताल के अधिकारियों तक पहुंचा, जिससे अस्पताल परिसर में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते डॉक्टर, नर्स, रेलकर्मी और महिला मरीज के परिजनों की भीड़ फीमेल सर्जिकल वार्ड के आसपास जुट गई। स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को हस्तक्षेप करना पड़ा। महिला मरीज के पति एवं रेलकर्मी गुलशन कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और इस दौरान उन्हें कई बोतल सलाइन चढ़ाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एक्सपायरी सलाइन कितनी मात्रा में चढ़ी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन जैसे ही एक्सपायरी डेट का पता चला, उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया और शिकायत करने पर उनके साथ भी ठीक व्यवहार नहीं किया गया। गुलशन कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों तक शिकायत करेंगे। मामले की जानकारी मिलते ही प्रभारी सीएमएस डॉ. जेके प्रसाद सर्जिकल वार्ड पहुंचे और मरीज व परिजनों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक्सपायरी सलाइन मरीज को चढ़ाने से पहले ही उसे बदल दिया गया था। डॉ. प्रसाद ने यह भी कहा कि एक्सपायरी सलाइन से सामान्य तौर पर कोई खास नुकसान नहीं होता, लेकिन अस्पताल में दवा और सलाइन के मामले में पूरी सतर्कता जरूरी है। उन्होंने महिला मरीज की शिकायत को जायज बताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोष सामने आने पर कार्रवाई निश्चित होगी। इस बीच, मेंस कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार और सचिव कृष्ण कुमार अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर, सिस्टर और मरीज के बीच तनाव को कम कराने का प्रयास किया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने रेलवे अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है कि एक्सपायरी सलाइन अस्पताल में पहुंची कैसे और मरीज को चढ़ाने की स्थिति तक कैसे पहुंची। मामले की निष्पक्ष जांच कर सलाइन की खरीद, भंडारण और मरीज को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जांच करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। जमालपुर रेलवे मुख्य अस्पताल के फीमेल सर्जिकल वार्ड में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भर्ती महिला मरीज जया कुमारी को कथित तौर पर एक्सपायरी डेट का सलाइन चढ़ाए जाने का मामला सामने आया। सलाइन की एक्सपायरी डेट पर नजर पड़ने के बाद मरीज जया कुमारी ने इसकी शिकायत अस्पताल की सिस्टर से की। शिकायत को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि सिस्टर के व्यवहार से महिला मरीज काफी आहत हुई और मानसिक रूप से परेशान हो गई। यह मामला धीरे-धीरे अस्पताल के अधिकारियों तक पहुंचा, जिससे अस्पताल परिसर में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते डॉक्टर, नर्स, रेलकर्मी और महिला मरीज के परिजनों की भीड़ फीमेल सर्जिकल वार्ड के आसपास जुट गई। स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को हस्तक्षेप करना पड़ा। महिला मरीज के पति एवं रेलकर्मी गुलशन कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और इस दौरान उन्हें कई बोतल सलाइन चढ़ाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एक्सपायरी सलाइन कितनी मात्रा में चढ़ी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन जैसे ही एक्सपायरी डेट का पता चला, उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया और शिकायत करने पर उनके साथ भी ठीक व्यवहार नहीं किया गया। गुलशन कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों तक शिकायत करेंगे। मामले की जानकारी मिलते ही प्रभारी सीएमएस डॉ. जेके प्रसाद सर्जिकल वार्ड पहुंचे और मरीज व परिजनों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक्सपायरी सलाइन मरीज को चढ़ाने से पहले ही उसे बदल दिया गया था। डॉ. प्रसाद ने यह भी कहा कि एक्सपायरी सलाइन से सामान्य तौर पर कोई खास नुकसान नहीं होता, लेकिन अस्पताल में दवा और सलाइन के मामले में पूरी सतर्कता जरूरी है। उन्होंने महिला मरीज की शिकायत को जायज बताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोष सामने आने पर कार्रवाई निश्चित होगी। इस बीच, मेंस कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार और सचिव कृष्ण कुमार अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर, सिस्टर और मरीज के बीच तनाव को कम कराने का प्रयास किया। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने रेलवे अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है कि एक्सपायरी सलाइन अस्पताल में पहुंची कैसे और मरीज को चढ़ाने की स्थिति तक कैसे पहुंची। मामले की निष्पक्ष जांच कर सलाइन की खरीद, भंडारण और मरीज को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जांच करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।


