उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस ने विरोध का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में आज भोपाल में “सत्याग्रह पैदल मार्च” निकाला जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा समर्थित संगठनों ने खरगे के सम्मान को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया। दरअसल, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की जनसभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने उसी स्थल पर हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया। संगठन की ओर से जनसभा के दौरान लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों को इस कार्रवाई की वजह बताया गया। खरगे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए घटना पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अस्पृश्यता का दर्द महसूस हुआ। इस मामले में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी राज्यसभा में घटना की जांच कराने का आश्वासन दिया है। भोपाल में यहां से यहां तक निकलेगा मार्च प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार सत्याग्रह पैदल मार्च आज शाम प्लेटिनम प्लाजा से रोशनपुरा चौराहे तक निकाला जाएगा। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता, जनप्रतिनिधि, पूर्व जनप्रतिनिधि, प्रदेश एवं जिला पदाधिकारी शामिल होंगे। कांग्रेस ने मोर्चा, संगठन, विभाग और प्रकोष्ठों के अध्यक्षों के अलावा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, वार्ड एवं मंडलम अध्यक्षों तथा पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं से भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है। क्या हुआ था हल्द्वानी में? युवा कांग्रेस ने भोपाल के अजाक थाने में की शिकायत मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनिकेत द्विवेदी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता विष्णु यादव की ओर से अजास थाने में दिए आवेदन में घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। पत्र में पुलिस से पूछा गया है कि खरगे के कार्यक्रम के बाद वास्तव में उसी मंच का शुद्धिकरण हुआ था या नहीं। यदि हुआ तो इसका निर्णय किसने लिया और इसका उद्देश्य क्या था। साथ ही शुद्धिकरण में शामिल लोगों, आयोजकों और मंच प्रबंधन की भूमिका की जांच, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो, फोटो और सोशल मीडिया सामग्री सुरक्षित रखने तथा यह पता लगाने की मांग की गई है कि कार्रवाई से अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति का सार्वजनिक अपमान या उसकी जातिगत पहचान के कारण गरिमा को ठेस तो नहीं पहुंची। दोष साबित होने पर संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।


