रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के लगभग 80 शिक्षकों से संबंधित पे-फिक्सेशन, वार्षिक इंक्रीमेंट तथा पूर्व में स्वीकृत Ph.D. इंक्रीमेंट की रिकवरी के मुद्दे को लेकर एमडीयू शिक्षक संघ (MDUTA) ने प्रशासन को लीगल नोटिस दिया। साथ ही चेतावनी दी कि शिक्षकों के अधिकार संबंधित हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मडूटा प्रधान प्रदीप कुमार गहलौत ने कहा कि कुलपति, रजिस्ट्रार, संयुक्त निदेशक ऑडिट व ए.आर. स्थापना शाखा सहित संबंधित अधिकारियों को यह लीगल नोटिस भेजा गया है। मांगों को लेकर संघ द्वारा एमडीयू प्रशासन के समक्ष कई बार व्यक्तिगत रूप व लिखित रूप में समस्याएं उठाई गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाना पड़ा। शिक्षकों से रिकवरी पर लगाई जाए रोक
मडूटा प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि हरियाणा सरकार के निर्देशों तथा उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए मामले की विधि-सम्मत समीक्षा की जानी चाहिए। शिक्षकों से की जा रही रिकवरी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। समाधान न होने पर दिया लीगल नोटिस
MDUTA प्रधान प्रदीप कुमार गहलौत ने कहा कि शिक्षक संघ ने हमेशा बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी। प्रशासन के समक्ष बार-बार इन समस्याओं को उठाया, लेकिन जब समाधान नहीं हुआ तो शिक्षकों के हित में लीगल नोटिस देना पड़ा। शिक्षकों का उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षकों को उनके वैधानिक एवं सेवा-संबंधी अधिकार दिलाना है। समाधान नहीं किया तो करेंगे आंदोलन
मडूटा प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि यदि एमडीयू प्रशासन द्वारा इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो शिक्षक संघ अपनी General Body Meeting बुलाकर आगामी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की रणनीति तय करेगा। इसमें काले बैज लगाकर विरोध दर्ज कराने से लेकर अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रमों पर विचार किया जा सकता है। एमडीयू शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें 1. CAS के तहत पदोन्नति के बाद पे-फिक्सेशन : यूनिवर्सिटी में कार्यरत अनेक शिक्षकों को Career Advancement Scheme (CAS) के तहत पदोन्नति मिल चुकी है, लेकिन पदोन्नति के बावजूद लंबे समय से उनकी पे-फिक्सेशन लंबित है। शिक्षक संघ ने मांग की कि पात्र शिक्षकों की पे-फिक्सेशन का कार्य बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए और उन्हें देय वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। 2. वार्षिक इंक्रीमेंट पर रोक: शिक्षकों के वार्षिक इंक्रीमेंट को रोक दिया गया है। वार्षिक इंक्रीमेंट रोकना सामान्य परिस्थितियों में दंडात्मक कार्रवाई का हिस्सा नहीं हो सकता और इसे केवल लागू सेवा नियमों एवं विधिवत अनुशासनात्मक प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जा सकता है। शिक्षकों के रोके गए वार्षिक इंक्रीमेंट को नियमानुसार जारी किया जाए। 3. वर्षों पूर्व दिए गए Ph.D. इंक्रीमेंट की रिकवरी: MDUTA ने Ph.D. इंक्रीमेंट की उन रिकवरी पर भी कड़ा विरोध किया, जो शिक्षकों को लगभग 8–10 वर्ष पूर्व प्रदान किए गए थे। इन इंक्रीमेंटों को उस समय सक्षम स्तर पर स्वीकृति के बाद प्रदान किया गया था और लंबे अंतराल के बाद शिक्षकों से इसकी रिकवरी करना न्यायसंगत नहीं है।


