सोनभद्र में साइबर क्राइम पुलिस ने 31 लाख रुपए की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी रेलवे के पेंशनरों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निशाना बनाते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन, एक वाई-फाई राउटर, चार सिम कार्ड और 53 हजार रुपए नकद बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, 17 जून 2025 को आरोपियों ने एक पीड़ित को फोन किया। खुद को पेंशन विभाग का अधिकारी बताते हुए पीपीओ नंबर में सुधार और मोबाइल नंबर बंद होने का डर दिखाया। इसके बाद बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की। आरोपियों ने पीड़ित के मोबाइल पर APK फाइल या लिंक भेजकर स्क्रीन शेयरिंग कराई। इसके जरिए OTP हासिल कर बैंक खाते से करीब 31 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके अलावा PhonePe के जरिए 1 लाख रुपए और 10 लाख रुपए की FD भी कराई गई। रेलवे पेंशनरों का डेटा जुटाते थे पूछताछ में सामने आया कि गिरोह रेलवे के पेंशनरों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा जुटाता था। आरोपी UMEED पोर्टल के RASS टैब पर जन्मतिथि का अनुमान लगाकर कर्मचारियों की जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद डेटा की कॉपी पेंशनर को भेजकर उसका भरोसा जीतते और खुद को रेलवे अधिकारी बताते थे। कभी-कभी आरोपी रेलवे बोर्ड का अधिकारी बनकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सूची और PPO नंबर भी हासिल करते थे। इसके बाद पेंशन, PPO में सुधार या मोबाइल नंबर बंद होने का डर दिखाकर बैंकिंग जानकारी लेते थे। कोलकाता से पकड़े गए दोनों आरोपी साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच के बाद मनीष कुमार शाह (30), निवासी साहेबगंज, झारखंड और रूपक कुमार (54), निवासी बांका, झारखंड को कोलकाता से गिरफ्तार किया। जांच में पवन मंडल और मुकेश मंडल के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि रेलवे कर्मचारियों का डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचता था। गिरोह में डेटा उपलब्ध कराने, कॉल करने, बैंक खाते मुहैया कराने और ATM से ठगी की रकम निकालने के लिए अलग-अलग सदस्य काम करते थे। पूछताछ में धनबाद, समस्तीपुर, हापुड़, संभल और मुंगेर समेत कई जगहों पर लाखों रुपए की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।


