जयपुर। हाईकोर्ट ने जयपुर की जीवनदायिनी कहे जाने वाले रामगढ़ बांध व उसके प्रवाह क्षेत्र को भू-माफिया और रसूखदारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सख्ती दिखाई है। कोर्ट भी बांध के कैचमेंट (भराव) एरिया में 386 अतिक्रमण (अवैध निर्माणों और रसूखदारों के कब्जे) का डेटा देखकर दंग रह गया। इसमें निम्स यूनिवर्सिटी के अलावा तीन रिसॉर्ट और दो एलएलपी कंपनियों के सिक्स स्टार लैण्डस्कैप प्रा. लि. व प्लासिविल प्रोपर्टी बिल्ड एलएलपी नई दिल्ली के भी अतिक्रमण बताए हैं।
हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट संदेश दिया है कि अब नोटिस-नोटिस का खेल नहीं चलेगा। कागजी औपचारिकताएं पूरी करने का समय बीत चुका है और अब धरातल पर ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।
अखबार के माध्यम से अतिक्रमियों को नोटिस
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने राजस्थान पत्रिका में 11 अगस्त 2011 को मर गया रामगढ़ शीर्षक से प्रकाशित फोटो समाचार के आधार पर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। कोर्ट ने अतिक्रमियों को व्यक्तिश: नोटिस जारी करने के बजाय राजस्थान पत्रिका व एक अन्य दैनिक समाचार पत्र के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
यहां देखें हाईकोर्ट में पेश अतिक्रमियों की सूची :
अतिक्रमण हटाने के लिए सिर्फ 15 दिन का समय
कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमियों को 15 दिन का समय दिया जाए। इसके बावजूद कोई कब्जा नहीं हटाए तो प्रशासन अतिक्रमी से खर्चा वसूलकर जमीन खाली कराने की कार्रवाई करे। साथ ही कहा कि रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र में किसी हाल में सबमर्सिबल पंप का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
अब सितंबर में होगी मामले की सुनवाई
इस पर महाधिवक्ता ने बताया कि कैचमेंट एरिया में बने नलकूप सप्लाई व सरकारी योजनाओं में काम आ रहे हैं। जल जीवन मिशन में 8 नलकूप हैं। अब सितंबर महीने के तीसरे सप्ताह में सुनवाई होगी। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की ढिलाई पर सख्ती दिखाई थी। जयपुर कलक्टर की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जो गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान सार्वजनिक हुई।
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रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में वर्तमान अतिक्रमण
- शाहपुरा की माधोबेणी नदी -12
- विराटनगर की बाणगंगा नदी – 14
- जममावारामगढ़ क्षेत्र-273
- आंधी-6
- आमेर-81
इनमें से अधिकांश में काश्तकारों की ओर से खेती की जा रही है।


