Jock Itch Symptoms: गर्मियों के मौसम में या वर्कआउट के बाद जांघों (Groin) के आसपास खुजली होना बहुत आम बात लगती है। ज्यादातर लोग इसे साधारण पसीना या घमौरियां मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, अगर यह खुजली बार-बार हो रही है, त्वचा लाल हो गई है और जलन महसूस हो रही है, तो संभल जाइए। यह समस्या सिर्फ पसीने की वजह से नहीं, बल्कि जॉक इच (Jock Itch) नाम के इंफेक्शन के कारण हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान में इसे टिनिया क्रूरिस (Tinea Cruris) कहा जाता है। आइए समझते हैं कि जॉक इच क्या है, यह क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या होता है जॉक इच (Jock Itch)?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, जॉक इच त्वचा का एक फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection) है, जो शरीर के नमी वाले हिस्सों में तेजी से पनपता है। हमारे शरीर पर कई तरह के फंगस प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं और आमतौर पर ये नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन जब इन्हें गर्मी और नमी वाला माहौल मिलता है, तो ये तेजी से बढ़ने लगते हैं और इंफेक्शन का रूप ले लेते हैं। यह इंफेक्शन मुख्य रूप से जांघों के अंदरूनी हिस्से, जननांगों के आसपास और नितंबों (Buttocks) की त्वचा को प्रभावित करता है। नाम में ‘जॉक’ होने के कारण लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ खिलाड़ियों या एथलीट्स को होता है। हालांकि खिलाड़ी ज्यादा पसीना बहाते हैं इसलिए उनमें यह आम है, लेकिन यह बीमारी किसी भी आम इंसान को हो सकती है।
जॉक इच के मुख्य लक्षण क्या हैं?
यदि आपको जांघों के बीच समस्या महसूस हो रही है, तो आप इन आसान लक्षणों से पहचान सकते हैं;
- लाल या गहरे रंग के चकत्ते।
- तेज खुजली और जलन।
- त्वचा का पपड़ीदार होना।
- उभरे हुए किनारे और दाने।
किन वजहों से फैलता है यह फंगल इंफेक्शन?
क्लीवलैंड क्लिनिक और मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, जॉक इच के पीछे कई कारण हो सकते हैं;
- नमी और पसीना।
- टाइट कपड़े पहनना।
- संक्रमित सामान शेयर करना।
- एथलीट्स फुट (Athlete’s Foot)।
- ज्यादा वजन होना।
जॉक इच से बचाव के उपाय
- जॉक इच भले ही परेशान करने वाली बीमारी हो, लेकिन थोड़ी सी समझदारी और साफ-सफाई रखकर इससे आसानी से बचा जा सकता है;
- हिस्से को हमेशा सूखा रखें।
- ढील-ढाले कपड़े पहनें।
- कपड़े और तौलिया रोज बदलें।
- एंटीफंगल पाउडर या क्रीम।
- खुजलाने से बचें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


