5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal

5 साल के फतेह ने Thailand में रचा इतिहास, Gatka on Skates में जीता World Martial Arts Games Gold Medal

कभी-कभी बच्चों में छोटी उम्र से ही ऐसी प्रतिभा दिखाई देने लगती है, जिसे पहचानने के लिए सिर्फ ध्यान और सही मौके की जरूरत होती है। पंजाब के पांच वर्षीय फतेह की कहानी कुछ ऐसी ही है। बेहद कम उम्र में गटका जैसे पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट में अपनी पहचान बना चुके फतेह ने थाईलैंड के पटाया में आयोजित विश्व मार्शल आर्ट खेल 2026 में ‘गटका ऑन स्केट्स’ में स्वर्ण पदक जीतकर खास उपलब्धि हासिल की है। वह स्केट्स पर गटका प्रदर्शन करने वाले पहले बच्चे बने हैं।फतेह की इस उपलब्धि के पीछे कई साल की मेहनत और परिवार का लगातार साथ है। उनकी मां नवप्रीत कौर के मुताबिक, जब फतेह करीब दो साल के थे, तब उनके पिता रामनदीप सिंह ने उनके हाथ और कलाई की गतिविधियों में कुछ खास देखा। रामनदीप खुद भी खिलाड़ी रहे हैं और यूरोप में शरीर सौष्ठव प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने बेटे की इस रुचि को समझते हुए उसके लिए छोटी और उसके अनुकूल कृपाण तैयार करवाई और गटका का अभ्यास शुरू कराया।बता दें कि फतेह ने सिर्फ गटका में ही कम उम्र में उपलब्धियां हासिल नहीं की हैं। करीब साढ़े तीन साल की उम्र में उन्होंने यूरोप में विश्व ग्रां प्री फिट किड और मिस्टर यूनिवर्सल फिट किड का खिताब भी जीता था। इसके बाद वह सिंगापुर और थाईलैंड में भी प्रदर्शन कर चुके हैं। परिवार के मुताबिक, फतेह की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कई यात्राएं कीं और प्रशिक्षण के दौरान हर जरूरत का ध्यान रखा।पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से पहले परिवार के सामने वीजा की मुश्किल भी आई। नवप्रीत का वीजा मंजूर नहीं हुआ था, जिसके बाद वह काफी परेशान हुईं। उन्हें चिंता थी कि इतनी कम उम्र में फतेह विदेश कैसे जाएंगे। हालांकि, उनके पिता उनके साथ गए और प्रतियोगिता में फतेह ने शानदार प्रदर्शन किया। लिथुआनिया में हुई उस प्रतियोगिता में उन्होंने अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। वहां मौजूद लोगों ने पहली बार गटका देखा था और तलवार के साथ उनके प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा था।इसके बाद फतेह ने दूसरी प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और वहां भी पहला स्थान हासिल किया। सिंगापुर में भी उन्हें सम्मान और पहचान मिली। इसी बीच उनके पिता की नजर फोन पर थाईलैंड के पटाया में होने वाले विश्व मार्शल आर्ट खेल की जानकारी पर पड़ी। परिवार ने फतेह का पंजीकरण कराया और आयोजकों को बताया कि वह गटका का प्रदर्शन करेंगे।शुरुआत में आयोजक इतनी कम उम्र के बच्चे को तलवार के साथ मंच पर उतारने को लेकर थोड़े चिंतित थे, लेकिन उन्होंने फतेह को प्रदर्शन की अनुमति दे दी। अलग-अलग देशों से आए खिलाड़ियों के बीच फतेह ने स्केट्स पर गटका पेश किया और स्वर्ण पदक जीत लिया। इस उपलब्धि ने उनकी पहचान को और मजबूत किया है।गौरतलब है कि फतेह की मां इस पूरी यात्रा को सिर्फ पदकों से नहीं जोड़तीं। उनका कहना है कि हर बच्चे में कोई न कोई खास प्रतिभा होती है और माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे उसे पहचानें और आगे बढ़ने का मौका दें। परिवार फिलहाल फतेह के भविष्य को लेकर कोई निश्चित योजना नहीं बना रहा है। दिसंबर में सिंगापुर और जनवरी में मलेशिया में उनके कार्यक्रम तय हैं। परिवार का कहना है कि जहां भी अच्छा अवसर मिलेगा, फतेह वहां जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। 

कभी-कभी बच्चों में छोटी उम्र से ही ऐसी प्रतिभा दिखाई देने लगती है, जिसे पहचानने के लिए सिर्फ ध्यान और सही मौके की जरूरत होती है। पंजाब के पांच वर्षीय फतेह की कहानी कुछ ऐसी ही है। बेहद कम उम्र में गटका जैसे पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट में अपनी पहचान बना चुके फतेह ने थाईलैंड के पटाया में आयोजित विश्व मार्शल आर्ट खेल 2026 में ‘गटका ऑन स्केट्स’ में स्वर्ण पदक जीतकर खास उपलब्धि हासिल की है। वह स्केट्स पर गटका प्रदर्शन करने वाले पहले बच्चे बने हैं।
फतेह की इस उपलब्धि के पीछे कई साल की मेहनत और परिवार का लगातार साथ है। उनकी मां नवप्रीत कौर के मुताबिक, जब फतेह करीब दो साल के थे, तब उनके पिता रामनदीप सिंह ने उनके हाथ और कलाई की गतिविधियों में कुछ खास देखा। रामनदीप खुद भी खिलाड़ी रहे हैं और यूरोप में शरीर सौष्ठव प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने बेटे की इस रुचि को समझते हुए उसके लिए छोटी और उसके अनुकूल कृपाण तैयार करवाई और गटका का अभ्यास शुरू कराया।
बता दें कि फतेह ने सिर्फ गटका में ही कम उम्र में उपलब्धियां हासिल नहीं की हैं। करीब साढ़े तीन साल की उम्र में उन्होंने यूरोप में विश्व ग्रां प्री फिट किड और मिस्टर यूनिवर्सल फिट किड का खिताब भी जीता था। इसके बाद वह सिंगापुर और थाईलैंड में भी प्रदर्शन कर चुके हैं। परिवार के मुताबिक, फतेह की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कई यात्राएं कीं और प्रशिक्षण के दौरान हर जरूरत का ध्यान रखा।
पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से पहले परिवार के सामने वीजा की मुश्किल भी आई। नवप्रीत का वीजा मंजूर नहीं हुआ था, जिसके बाद वह काफी परेशान हुईं। उन्हें चिंता थी कि इतनी कम उम्र में फतेह विदेश कैसे जाएंगे। हालांकि, उनके पिता उनके साथ गए और प्रतियोगिता में फतेह ने शानदार प्रदर्शन किया। लिथुआनिया में हुई उस प्रतियोगिता में उन्होंने अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। वहां मौजूद लोगों ने पहली बार गटका देखा था और तलवार के साथ उनके प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा था।
इसके बाद फतेह ने दूसरी प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और वहां भी पहला स्थान हासिल किया। सिंगापुर में भी उन्हें सम्मान और पहचान मिली। इसी बीच उनके पिता की नजर फोन पर थाईलैंड के पटाया में होने वाले विश्व मार्शल आर्ट खेल की जानकारी पर पड़ी। परिवार ने फतेह का पंजीकरण कराया और आयोजकों को बताया कि वह गटका का प्रदर्शन करेंगे।
शुरुआत में आयोजक इतनी कम उम्र के बच्चे को तलवार के साथ मंच पर उतारने को लेकर थोड़े चिंतित थे, लेकिन उन्होंने फतेह को प्रदर्शन की अनुमति दे दी। अलग-अलग देशों से आए खिलाड़ियों के बीच फतेह ने स्केट्स पर गटका पेश किया और स्वर्ण पदक जीत लिया। इस उपलब्धि ने उनकी पहचान को और मजबूत किया है।
गौरतलब है कि फतेह की मां इस पूरी यात्रा को सिर्फ पदकों से नहीं जोड़तीं। उनका कहना है कि हर बच्चे में कोई न कोई खास प्रतिभा होती है और माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे उसे पहचानें और आगे बढ़ने का मौका दें। परिवार फिलहाल फतेह के भविष्य को लेकर कोई निश्चित योजना नहीं बना रहा है। दिसंबर में सिंगापुर और जनवरी में मलेशिया में उनके कार्यक्रम तय हैं। परिवार का कहना है कि जहां भी अच्छा अवसर मिलेगा, फतेह वहां जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

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