पुरानी पेंशन स्कीम लागू होगी या नहीं? सरकार ने संसद में दिया दो टूक जवाब

पुरानी पेंशन स्कीम लागू होगी या नहीं? सरकार ने संसद में दिया दो टूक जवाब
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को संसद को बताया कि सरकार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस नहीं ला रही है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर बहुत ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि राजस्थान और पंजाब जैसे कुछ राज्य पुरानी योजना पर वापस लौट रहे हैं, लेकिन चौधरी ने साफ़ कर दिया कि मौजूदा नियमों के तहत, अगर राज्य नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें NPS से कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
 

इसे भी पढ़ें: JP Nadda का Rahul Gandhi पर पलटवार: देश को कर रहे गुमराह, फैलाना चाहते हैं अराजकता

चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र और पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से ओपीएस में वापसी के बारे में सूचित किया है। उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए अधिनियम, 2013, जिसे पीएफआरडीए (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत निकासी) विनियम, 2015 और अन्य प्रासंगिक विनियमों के साथ पढ़ा जाता है, के तहत कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत नौकरीपेशा लोगों के संचित कोष– जैसे कि सरकारी अंशदान, एनपीएस के लिए कर्मचारियों के अंशदान के साथ-साथ संचय को वापस किया जा सकता है और राज्य सरकार को वापस जमा किया जा सकता है। 
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, चौधरी ने कहा कि राज्यों में ओपीएस की बहाली विशेष रूप से राज्य नीति विवेकाधिकार के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी हालिया राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट में राज्यों द्वारा ओपीएस को वापस लेने के वित्तीय निहितार्थों को रेखांकित किया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक परिभाषित योगदान-आधारित योजना है जिसे 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पेश किया गया था। 
 

इसे भी पढ़ें: हमें अमित शाह का पर्सनल ओपिनियन नहीं सुनना, राहुल का सरकार पर बड़ा हमला, कहा-उनमें गट्स नहीं कि हमारे सामने आकर LS में खड़ा हो सकें

चौधरी ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के लिए पेंशन लाभ में सुधार की दृष्टि से, एनपीएस को संशोधित करने के उपाय सुझाने के लिए तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। हितधारकों के साथ समिति के विचार-विमर्श के आधार पर, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) पहले ही 1 अप्रैल 2025 से एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद प्रति माह 10,000 रुपये के न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान के साथ मुद्रास्फीति से जुड़े लाभ प्रदान करना है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पुरानी पेंशन स्कीम लागू होगी या नहीं? सरकार ने संसद में दिया दो टूक जवाब

पुरानी पेंशन स्कीम लागू होगी या नहीं? सरकार ने संसद में दिया दो टूक जवाब
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को संसद को बताया कि सरकार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस नहीं ला रही है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर बहुत ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ेगा। हालांकि राजस्थान और पंजाब जैसे कुछ राज्य पुरानी योजना पर वापस लौट रहे हैं, लेकिन चौधरी ने साफ़ कर दिया कि मौजूदा नियमों के तहत, अगर राज्य नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें NPS से कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
 

इसे भी पढ़ें: JP Nadda का Rahul Gandhi पर पलटवार: देश को कर रहे गुमराह, फैलाना चाहते हैं अराजकता

चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र और पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से ओपीएस में वापसी के बारे में सूचित किया है। उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए अधिनियम, 2013, जिसे पीएफआरडीए (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत निकासी) विनियम, 2015 और अन्य प्रासंगिक विनियमों के साथ पढ़ा जाता है, के तहत कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत नौकरीपेशा लोगों के संचित कोष– जैसे कि सरकारी अंशदान, एनपीएस के लिए कर्मचारियों के अंशदान के साथ-साथ संचय को वापस किया जा सकता है और राज्य सरकार को वापस जमा किया जा सकता है। 
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, चौधरी ने कहा कि राज्यों में ओपीएस की बहाली विशेष रूप से राज्य नीति विवेकाधिकार के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी हालिया राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट में राज्यों द्वारा ओपीएस को वापस लेने के वित्तीय निहितार्थों को रेखांकित किया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक परिभाषित योगदान-आधारित योजना है जिसे 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पेश किया गया था। 
 

इसे भी पढ़ें: हमें अमित शाह का पर्सनल ओपिनियन नहीं सुनना, राहुल का सरकार पर बड़ा हमला, कहा-उनमें गट्स नहीं कि हमारे सामने आकर LS में खड़ा हो सकें

चौधरी ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के लिए पेंशन लाभ में सुधार की दृष्टि से, एनपीएस को संशोधित करने के उपाय सुझाने के लिए तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। हितधारकों के साथ समिति के विचार-विमर्श के आधार पर, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) पहले ही 1 अप्रैल 2025 से एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद प्रति माह 10,000 रुपये के न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान के साथ मुद्रास्फीति से जुड़े लाभ प्रदान करना है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *