मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र की बभनी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दाहा में मिड डे मील खाने के बाद बीमार हुए 60 बच्चे अब खतरे से बाहर हैं। मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय में कार्यरत तीन रसोइया दाई रानी देवी, कल्पना देवी और अविता कुमारी को तत्काल प्रभाव से चयन मुक्त कर दिया है। बच्चों को शनिवार खिचड़ी परोसी गई थी वहीं, विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। बताया गया कि शनिवार को विद्यालय में बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। भोजन करने के कुछ देर बाद कई बच्चों ने पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। बच्चों ने भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने की बात भी बताई। इसके बाद विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। पढ़ें, क्या था मामला… अभिभावकों ने बच्चों को अस्पताल पहुंचाया अभिभावक आनन-फानन में बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गम्हरिया लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज किया। मिड डे मील खाने के बाद करीब 60 बच्चों के बीमार होने की बात सामने आई थी। फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य है। खिचड़ी खाने के बाद तबीयत बिगड़ने लगी बच्चों ने बताया कि खिचड़ी खाने के कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों का दावा है कि एक थाली में मरी हुई छिपकली मिली थी। बच्चों के अनुसार इसकी जानकारी प्रभारी प्रधानाध्यापिका और रसोइयों को दी गई, लेकिन उन्हें किसी से कुछ नहीं बताने को कहा गया। इसके बाद बची हुई खिचड़ी फेंक दी गई और विद्यालय में छुट्टी कर दी गई। बच्चों ने यह भी बताया कि छुट्टी के बाद विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया था। एचएम और तीनों रसोइयों से मांगा गया था जवाब मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से प्रभारी प्रधानाध्यापिका और तीनों रसोइयों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। निर्धारित समय तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया। अधिकारियों ने इसे उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, कर्तव्य के प्रति घोर उदासीनता और मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही माना है। भोजन परोसने से पहले शिक्षकों को चखना अनिवार्य विभागीय नियमों के अनुसार बच्चों को भोजन परोसने से करीब आधा घंटा पहले प्रधानाध्यापक, शिक्षक और रसोइया को भोजन चखना अनिवार्य है। इसके बावजूद विद्यालय में इस सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया गया। विभाग ने इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तीनों रसोइयों को चयन मुक्त कर दिया है। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार दोपहर बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। भोजन करने के बाद बच्चे घर चले गए। बाद में बच्चों के पेट दर्द और चक्कर आने की जानकारी मिली। डीपीओ बोले-मामले में कार्रवाई की गई है
डीपीओ रवि शास्त्री ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति अब सामान्य है। मामले की जांच कराई गई है। जांच और विभागीय कार्रवाई के तहत तीनों रसोइयों को चयन मुक्त किया गया है, जबकि प्रभारी प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र की बभनी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दाहा में मिड डे मील खाने के बाद बीमार हुए 60 बच्चे अब खतरे से बाहर हैं। मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय में कार्यरत तीन रसोइया दाई रानी देवी, कल्पना देवी और अविता कुमारी को तत्काल प्रभाव से चयन मुक्त कर दिया है। बच्चों को शनिवार खिचड़ी परोसी गई थी वहीं, विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है। बताया गया कि शनिवार को विद्यालय में बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। भोजन करने के कुछ देर बाद कई बच्चों ने पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। बच्चों ने भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने की बात भी बताई। इसके बाद विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। पढ़ें, क्या था मामला… अभिभावकों ने बच्चों को अस्पताल पहुंचाया अभिभावक आनन-फानन में बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गम्हरिया लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज किया। मिड डे मील खाने के बाद करीब 60 बच्चों के बीमार होने की बात सामने आई थी। फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य है। खिचड़ी खाने के बाद तबीयत बिगड़ने लगी बच्चों ने बताया कि खिचड़ी खाने के कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों का दावा है कि एक थाली में मरी हुई छिपकली मिली थी। बच्चों के अनुसार इसकी जानकारी प्रभारी प्रधानाध्यापिका और रसोइयों को दी गई, लेकिन उन्हें किसी से कुछ नहीं बताने को कहा गया। इसके बाद बची हुई खिचड़ी फेंक दी गई और विद्यालय में छुट्टी कर दी गई। बच्चों ने यह भी बताया कि छुट्टी के बाद विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया था। एचएम और तीनों रसोइयों से मांगा गया था जवाब मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से प्रभारी प्रधानाध्यापिका और तीनों रसोइयों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। निर्धारित समय तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया। अधिकारियों ने इसे उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, कर्तव्य के प्रति घोर उदासीनता और मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही माना है। भोजन परोसने से पहले शिक्षकों को चखना अनिवार्य विभागीय नियमों के अनुसार बच्चों को भोजन परोसने से करीब आधा घंटा पहले प्रधानाध्यापक, शिक्षक और रसोइया को भोजन चखना अनिवार्य है। इसके बावजूद विद्यालय में इस सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया गया। विभाग ने इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए तीनों रसोइयों को चयन मुक्त कर दिया है। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार दोपहर बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। भोजन करने के बाद बच्चे घर चले गए। बाद में बच्चों के पेट दर्द और चक्कर आने की जानकारी मिली। डीपीओ बोले-मामले में कार्रवाई की गई है
डीपीओ रवि शास्त्री ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति अब सामान्य है। मामले की जांच कराई गई है। जांच और विभागीय कार्रवाई के तहत तीनों रसोइयों को चयन मुक्त किया गया है, जबकि प्रभारी प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

