डांगावास हत्याकांड में 5 अगस्त को मेड़ता एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डांगावास पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा, आक्रोश और आगे की रणनीति पर चर्चा की। संगठन ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। 2015 में भूमि विवाद के बाद हुई थी हिंसा PUCL के अनुसार, 14 मई 2015 को मेड़ता ब्लॉक के डांगावास गांव में भूमि अधिकार को लेकर विवाद के बाद हिंसा हुई थी। इसमें पांच दलितों सहित छह लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग उठी थी। आंदोलन के दबाव में सरकार से सीबीआई जांच सहित 18 मांगों पर सहमति बनी थी। हालांकि, PUCL का आरोप है कि समय बीतने के साथ सरकार अपने अधिकांश वादों से पीछे हट गई। इसके चलते पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। 11 साल बाद सभी 40 आरोपी दोषमुक्त करीब 11 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 5 अगस्त 2026 को मेड़ता की एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट ने मामले के सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। PUCL के मुताबिक, अदालत ने अपने फैसले में घटना में पांच लोगों की मौत और कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने को निर्विवाद माना, लेकिन अपराध करने वालों की पहचान विधिसम्मत साक्ष्यों से साबित नहीं होने की बात कही। फैसले के बाद पीड़ित परिवारों में निराशा है। परिवारों का कहना है कि इतने लंबे इंतजार के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। रामदेव मंदिर में हुई ग्रामीणों के साथ बैठक PUCL की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव, राष्ट्रीय सचिव भंवर मेघवंशी, प्रदेश कोषाध्यक्ष राकेश शर्मा और दलित राइट्स एक्टिविस्ट एडवोकेट तारा चन्द वर्मा डांगावास पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने रामदेव मंदिर में ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान पीड़ित परिवारों के सदस्यों, खासकर महिलाओं से बातचीत कर उनकी पीड़ा सुनी गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आगे की कानूनी लड़ाई में पीड़ित पक्ष को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की तैयारी PUCL ने कहा कि 5 अगस्त के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में चुनौती देने की प्रक्रिया में संगठन पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा रहेगा। इसके साथ ही न्याय की लड़ाई में कानूनी और सामाजिक स्तर पर सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया गया। संगठन का कहना है कि अदालत से आरोपियों के दोषमुक्त होने का मतलब यह नहीं है कि घटना हुई ही नहीं। अदालत ने भी घटना में हुई मौतों और लोगों के घायल होने को माना है। ऐसे में डांगावास की न्याय यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। न्याय के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

