विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को कोटा में विशाल वाहन और पैदल रैली का आयोजन किया गया। रैली की शुरुआत कोटा के पूर्व शासक कोटिया भील के स्मारक पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों और युवाओं ने अपनी पारंपरिक संस्कृति व विरासत की झांकियां प्रस्तुत करते हुए रैली में शिरकत की। राजस्थान आदिवासी सेवा संघ और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने इस रैली का आयोजन किया। रैली विशाल जनसभा में बदली यह रैली रंगबाड़ी से शुरु होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पहुंची। यहां एक विशाल जनसभा में बदल गई। रैली और सभा के दौरान जल, जंगल, जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए निवर्तमान उप महापौर पवन मीना ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस इस बार कोटा की धरा पर एक अलग तर्ज पर मनाया जा रहा है। यह किसी एक वर्ग का कार्यक्रम न होकर पहली बार समस्त आदिवासी समाजों (भील, मीना, सहरिया, गरासिया) को एक मंच पर लाने का प्रयास है। आदिवासी संस्कृति और परंपरा का इतिहास बहुत प्राचीन है, जिसके प्रमाण सिंधु घाटी सभ्यता तक मिलते हैं। युवाओं एवं छात्र संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया आदिवासियों ने महाराणा प्रताप और भगवान देवनारायण के समय से ही हर वर्ग की रक्षा और देश के गौरव में अग्रणी भूमिका निभाई है। आदिवासी समाज के नेताओं ने बताया कि श्रीराम रंगमंच पर आयोजित मुख्य सभा में समाज की होनहार प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही हाड़ौती क्षेत्र में आदिवासी समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास तथा भविष्य की दिशा पर गहन चिंतन-मनन हुआ। समारोह में समाज के गणमान्य लोगों, किसानों, युवाओं एवं छात्र संगठनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

