Baramati Trainer Aircraft Crash: महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर रविवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नियमित उड़ान पर निकला एक प्रशिक्षण विमान रनवे के पास अचानक क्रैश-लैंड हो गया। हालांकि इस हादसे में ट्रेनी पायलट सुरक्षित बाहर निकल आया और विमान को आंशिक क्षति पहुंची, लेकिन इस घटना ने एविएशन सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और स्थानीय एयरस्ट्रिप के सुरक्षा मानकों पर कड़े सवाल उठने लगे हैं।
Baramati Plane Crash: रनवे से चंद कदम दूर लड़खड़ाया विमान
पुणे जिले के बारामती स्थित हवाई पट्टी पर रविवार दोपहर करीब 12:35 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक निजी फ्लाइंग अकादमी का प्रशिक्षण विमान रनवे को छूने से ठीक पहले असंतुलित हो गया। चश्मदीदों के मुताबिक, विमान काफी कम ऊंचाई पर था और टचडाउन की प्रक्रिया के दौरान अप्रत्याशित रूप से जमीन से टकरा गया।
हादसा एयरपोर्ट परिसर के भीतर ही हुआ। एयरपोर्ट ग्राउंड क्रू और आपातकालीन राहत दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ट्रेनी पायलट को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि क्रैश के बाद विमान में आग नहीं लगी, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई।
सुरक्षा के कड़े मानकों पर बार-बार उठते सवाल
बारामती का यह इलाका पिछले कुछ समय से लगातार विमान हादसों की वजह से सुर्खियों में है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब यहां एविएशन प्रोटोकॉल और तकनीकी खामियों पर सवाल उठे हों:
मई 2026 की घटना: कुछ ही महीने पहले रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी का एक विमान तकनीकी खराबी के चलते आपात स्थिति में क्रैश-लैंड हुआ था, जिसमें पायलट बाल-बाल बचा था।
जनवरी 2026 का दर्दनाक हादसा: इसी साल जनवरी में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर आ रहा लियरजेट-45 (Learjet 45) चार्टर विमान दूसरी बार लैंडिंग के प्रयास के दौरान क्रैश हो गया था। इस भीषण दुर्घटना में अजित पवार, उनके सुरक्षा अधिकारी, अटेंडेंट और दोनों पायलटों (कैप्टन सुमित कपूर व फर्स्ट ऑफिसर शांभवी पाठक) समेत सभी लोगों की जान चली गई थी।
विशेषज्ञों की राय: क्या चूक रही है व्यवस्था?
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूलों में इस्तेमाल होने वाले सिंगल-इंजन एयरक्राफ्ट्स का नियमित और सघन ‘एयरवर्थनेस’ (उड़ान योग्यता) इंस्पेक्शन बेहद जरूरी है।
“फ्लाइंग अकादमियों में बढ़ते ट्रैफिक, सीमित रनवे इंफ्रास्ट्रक्चर और अक्सर मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच कड़े एविएशन प्रोटोकॉल का पालन ही हादसों को रोक सकता है।”
स्थानीय स्तर पर बार-बार सामने आ रही इन दुर्घटनाओं के बाद अब मांग उठ रही है कि बारामती एयरस्ट्रिप पर संचालन मानकों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराया जाए ताकि युवा ट्रेनी पायलटों और वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। DGCA ने इस ताजा मामले में भी तकनीकी जांच के निर्देश दे दिए हैं।

